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50 Years of Sholay: जब इस एक्टर को शोले में काम करने पर फीस के तौर पर मिला था ये खास सामान, बेहद दिलचस्प है फिल्म के पीछे का किस्सा

‘शोले’ के 50 साल बाद भी इसके डायलॉग, गाने और किस्से लोगों के दिल में ताजे हैं. जानें फिल्म से जुड़े 6 अनोखे किस्से जो इसे अमर बना गए.

50 years of sholay

50 Years of Sholay: साल 1975 में 15 अगस्त के दिन रिलीज हुई ‘शोले’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा का ऐसा मील का पत्थर है जिसने कहानी, किरदार और संवादों के दम पर इतिहास रच दिया. रमेश सिप्पी के निर्देशन और सलीम-जावेद की दमदार लेखनी ने इसे अमर बना दिया.

अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, जया बच्चन, संजीव कुमार और अमजद खान जैसे सितारों ने अपने अभिनय से इसे जिंदा कर दिया. 50 साल बाद भी इसके डायलॉग, गाने और किरदार उतने ही ताजे लगते हैं जितने उस दौर में थे. आइए जानते हैं इस सुपरहिट फिल्म के कुछ अनोखे और दिलचस्प किस्से.

शोले की कहानी मशहूर लेखक जोड़ी सलीम खान और जावेद अख्तर ने तैयार की थी. यह जोड़ी पहले ही दीवार और जंजीर जैसी हिट फिल्में दे चुकी थी. शुरुआत में कहानी निर्देशक प्रकाश मेहरा को ऑफर की गई, लेकिन व्यस्त शेड्यूल के कारण उन्होंने मना कर दिया. इसके बाद फिल्म रमेश सिप्पी के पास पहुंची और उनके निर्देशन में यह सिनेमा के इतिहास की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल हो गई.

फिल्म का सबसे मशहूर किरदार गब्बर सिंह, चंबल घाटी के एक असली डाकू से प्रेरित था. यह डाकू इतना खौफनाक था कि पुलिसवालों को पकड़कर उनके नाक-कान काट देता था. जया भादुड़ी के पिता तरुण कुमार भादुड़ी ने उसकी कहानी अपनी किताब अभिशप्त चंबल में लिखी थी. अमजद खान ने इस किरदार को पर्दे पर इतने दमदार तरीके से निभाया कि वह हिंदी सिनेमा का सबसे यादगार विलेन बन गया.

गब्बर के गंदे और खतरनाक लुक को असली दिखाने के लिए उसकी खाकी वर्दी खास तौर पर मुंबई के चोर बाजार से खरीदी गई थी. खास बात यह है कि पूरी शूटिंग के दौरान इस वर्दी को एक बार भी नहीं धोया गया, ताकि किरदार में असलीपन बना रहे. इस वजह से गब्बर का लुक स्क्रीन पर और भी डरावना नजर आया.

फिल्म में सांभा का किरदार निभाने वाले मैक मोहन का सिर्फ एक डायलॉग था, अरे ओ सांभा…. इसके बावजूद उन्हें अपने रोल की शूटिंग के लिए मुंबई से बंगलूरू 27 बार आना-जाना पड़ा. यह वाकया बताता है कि शोले की शूटिंग कितनी लंबी और मेहनत भरी थी.

शोले की शूटिंग बंगलूरू के पास स्थित छोटे से शहर रामनगर में हुई थी. फिल्म की लोकप्रियता के बाद से लोग इस जगह को रामगढ़ के नाम से जानने लगे. आज यह एक मशहूर पर्यटन स्थल है, जहां लोग फिल्म के लोकेशन देखने और फोटो खिंचवाने खास तौर पर आते हैं.

रिलीज के पहले हफ्ते में शोले को फ्लॉप घोषित कर दिया गया था. उस समय इसकी कहानी में ठाकुर द्वारा गब्बर को मारने का दृश्य था, लेकिन सेंसर बोर्ड की आपत्ति के बाद इसे बदलकर गब्बर को पुलिस के हवाले किया गया. धीरे-धीरे फिल्म ने दर्शकों के दिल जीत लिए और यह सिनेमा की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में गिनी जाने लगी.

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-भारत एक्सप्रेस 



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