Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

NCERT ने जारी किया नया स्पेशल मॉड्यूल, विभाजन के लिए तीन चेहरों को ठहराया जिम्मेदार

NCERT ने भारत के बंटवारे पर नया स्पेशल मॉड्यूल जारी किया है, जिसमें मोहम्मद अली जिन्ना, कांग्रेस नेतृत्व और लॉर्ड माउंटबेटन को विभाजन की त्रासदी के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है.

NCERT New Module

NCERT New Module: आजादी का जश्न मनाते वक्त हम अक्सर उस दर्द को भूलने की कोशिश करते हैं, जो 1947 में भारत के बंटवारे के साथ आया था. लाखों लोग अपने घर-बार से उजड़ गए, हजारों की जान चली गई और करोड़ों की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल गई.

आजादी की मिठास में यह कड़वाहट हमेशा घुली रही. अब एनसीईआरटी ने इस दर्दनाक अध्याय को नई तरह से समझाने के लिए एक खास मॉड्यूल जारी किया है, ताकि आने वाली पीढ़ियां सिर्फ इतिहास की तारीखें ही नहीं, बल्कि उसके पीछे की सच्चाई और कारण भी जान सकें.

तीन चेहरों को ठहरया जिम्मेदार

इस नए मॉड्यूल में बंटवारे के लिए सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि तीन प्रमुख हस्तियों को जिम्मेदार ठहराया गया है. हालांकि ये स्पेशल मॉड्यूल नियमित किताबों का हिस्सा नहीं हैं.

पहला नाम है मोहम्मद अली जिन्ना का, जिन्होंने अलग देश की मांग को लगातार उठाया और पाकिस्तान बनने तक पीछे नहीं हटे.

दूसरा नाम है कांग्रेस पार्टी का, नेहरू और सरदार पटेल के नेतृत्व में पार्टी ने हालात के दबाव में आकर विभाजन को स्वीकार कर लिया.

और तीसरा नाम है लॉर्ड माउंटबेटन का, ब्रिटेन के आखिरी वायसराय, जिन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को जल्दी-जल्दी निपटाने की कोशिश की और नतीजा हिंसा और अफरातफरी के रूप में सामने आया.

कितना जरूरी था बंटवारा?

मॉड्यूल में यह भी कहा गया है कि भारत-पाकिस्तान का अलग होना किसी मजबूरी का नतीजा नहीं था, बल्कि हालात और गलत सोच का परिणाम था. कांग्रेस के नेताओं ने गृहयुद्ध और खून-खराबे से बचने के लिए इसे स्वीकार किया.

पंडित नेहरू ने इसे “बेहद खराब स्थिति में लिया गया बेहतर फैसला” बताया, जबकि सरदार पटेल ने इसे “कड़वा इलाज” कहा. महात्मा गांधी इसके खिलाफ थे, लेकिन उन्होंने विरोध शांतिपूर्ण तरीके से किया.

ये भी पढ़ें- प्रेसीडेंशियल रेफरेंस पर सुप्रीम कोर्ट के नोटिस का केंद्र सरकार, गोवा और पुड्डुचेरी सरकार ने दाखिल किया जवाब

माउंटबेटन ने की जल्दबाजी

बंटवारे की सबसे बड़ी खामियों में से एक थी माउंटबेटन की जल्दी. ब्रिटिश सरकार ने मूल रूप से जून 1948 तक सत्ता हस्तांतरण की योजना बनाई थी, लेकिन माउंटबेटन ने इसे 15 अगस्त 1947 पर खींच लाया.

नतीजा यह हुआ कि सीमाओं की रेखाएं खींचने वाला रेडक्लिफ कमीशन अपना काम अधूरा छोड़ गया. कई गांवों को आखिरी वक्त तक यह पता ही नहीं था कि वे भारत में हैं या पाकिस्तान में. इसी अफरातफरी ने हिंसा को और बढ़ा दिया.

आज भी ज़िंदा है बंटवारे की चोट

NCERT का मानना है कि यह विभाजन सिर्फ 1947 की घटना नहीं थी, बल्कि इसकी चोटें आज तक महसूस की जा रही हैं. भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव, कश्मीर मुद्दा, बढ़ते रक्षा खर्च और दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी—ये सब उसी दर्द की लंबी परछाईं हैं.

यह मॉड्यूल “Partition Horrors Remembrance Day” यानी 14 अगस्त को जारी किया गया. कक्षा 6 से 8 और 9 से 12 के लिए अलग-अलग संस्करण तैयार किए गए हैं, ताकि हर उम्र के छात्र इसे अपनी समझ के अनुसार पढ़ सकें.

Also Follow Bharat Express on X

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital