Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

जापान में किस मत-मजहब के लोग रहते हैं सबसे ज्यादा, जानें यहां कितने हिंदू-कितने मुस्लिम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जापान दौरे ने भारत-जापान संबंधों को नई दिशा दी है. इसी बीच जापान में धर्मों की स्थिति को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है. वहीं, भारत और नेपाल से आए प्रवासी हिंदू भी जापान की सांस्कृतिक विविधता में अपनी भूमिका निभा रहे हैं.

PM Modi Gujarat Visit

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय दो दिवसीय यात्रा पर जापान में हैं. टोक्यो पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत हुआ. इस दौरान उन्होंने जापानी नागरिकों का हाथ जोड़कर अभिवादन किया. पीएम मोदी की इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच तकनीकी, आर्थिक और रक्षा सहयोग को और मजबूत करना है. इसी बीच लोग इंटरनेट पर जापान और वहां की धार्मिक संस्कृति के बारे में जानने के लिए गूगल पर खूब सर्च कर रहे हैं. आइए जानते हैं कि जापान में कौन से धर्म प्रमुख हैं और वहां हिंदू व मुस्लिम समुदाय की स्थिति क्या है.

जापान का सबसे बड़ा और पारंपरिक धर्म

जापान का पारंपरिक धर्म शिंतो (Shinto) है. इसे वहां धर्म से ज्यादा एक जीवनशैली और संस्कृति के रूप में देखा जाता है. जापान की लगभग 48.5% आबादी शिंतो धर्म से जुड़ी है, यानी करीब 8.39 करोड़ लोग जुड़े हैं. शिंतो परंपरा में कामी (प्रकृति और आत्माओं) की पूजा की जाती है. जापान में करीब 1 लाख शिंतो मंदिर मौजूद हैं. त्योहारों और पारिवारिक आयोजनों में शिंतो की अहम भूमिका होती है.

कला और संस्कृति में गहराई से जुड़ा बौद्ध धर्म

बौद्ध धर्म जापान में छठी सदी में चीन और कोरिया से आया था. आज जापान की 46.3% आबादी बौद्ध धर्म का पालन करती है. बौद्ध धर्म ने जापान की कला, ध्यान पद्धति, बागवानी और जीवन शैली को गहराई से प्रभावित किया है. देशभर में हजारों बौद्ध मंदिर मौजूद हैं जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र भी हैं.

16वीं सदी में पुर्तगाली मिशनरियों के माध्यम से ईसाई धर्म जापान में आया. हालांकि यहां ईसाइयों की संख्या केवल 1% के करीब है. नागासाकी जैसे इलाकों में पुराने चर्च अब भी मौजूद हैं. ईसाई समुदाय शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में भी सक्रिय भूमिका निभाता है.

प्रवासी समुदाय का योगदान

जापान में मुस्लिम आबादी अभी भी बहुत कम है, लेकिन हाल के वर्षों में इसमें वृद्धि हुई है. 2010 में जहां करीब 1.10 लाख मुसलमान थे, वहीं 2022 तक यह संख्या 2.30 लाख हो गई. इंडोनेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, भारत और मलेशिया से आए प्रवासी मुस्लिम समुदाय का हिस्सा हैं. कुछ जापानी नागरिक इस्लाम से प्रभावित होकर इसे अपना भी रहे हैं. जापान में हिंदू, सिख, यहूदी और बहाई धर्म के लोग भी रहते हैं, लेकिन इनकी संख्या बहुत कम है. अधिकांश हिंदू भारत, नेपाल और श्रीलंका से आए प्रवासी हैं.

जापान में कुछ हिंदू मंदिर और भारतीय सांस्कृतिक केंद्र भी मौजूद हैं, जो भारतीय संस्कृति को जीवित रखते हैं.

ये भी पढ़े: PM Modi Japan Visit: जापान के सबसे बड़े अखबार ने लिया PM मोदी का इंटरव्यू, व्यापार, बुलेट ट्रेन से लेकर स्पेस प्रोग्राम तक पढ़ें सवालों के जवाब

Also Follow Bharat Express on X

 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Pension Mission Shakti Digital