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‘गुमनामी बाबा’ के कमरे से निकले सामान ख़ास क्यों हैं?

गुमनामी बाबा के कमरे से निकली 2760 वस्तुएं आज भी रहस्य बनी हुई हैं. इनमें महंगी घड़ियाँ, विदेशी पाइप, नेताजी के परिवार की तस्वीरें, दुर्लभ नक्शे और 1600 से अधिक पत्र शामिल हैं. क्या ये सबूत साबित करते हैं कि गुमनामी बाबा ही नेताजी थे?

Gumnami Baba

पिछले हफ़्ते नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विषय में इस कॉलम में जो मैंने लिखा था उस पर बहुत प्रतिक्रियाएँ आई हैं. पाठकों को और जानने की उत्सुकता है. इस विषय में यूट्यूब पर तमाम इंटरव्यू व रिपोर्ट्स हैं. वहाँ आप ‘गुमनामी बाबा’ या सुभाष चंद्र बोस’ टाइप करके उन्हें देख सकते हैं. विशेषकर अनुज धर, चंद्रचूड़ घोष, शक्ति सिंह, डॉ दिनेश सिंह तोमर, आदि के इंटरव्यू व ज़ी टीवी पर एक ‘गुमनामी बाबा का बॉक्स नंबर 26’ जैसी रिपोर्ट्स देख, सुनकर आप दंग रह जाएँगे.

पिछले लेख में मैंने उनके कमरे से मिली 2760 वस्तुओं में से कुछ का ज़िक्र किया था. यहाँ उन सामानों में से कुछ और का विस्तार से वर्णन कर रहा हूँ. ये सूची इतनी प्रभावशाली है कि केवल साधना करने वाले संत का सामान नहीं हो सकता. आप सोचने पर मजबूर हो जाएँगे कि ‘गुमनामी बाबा’ अगर नेताजी सुभाष चंद्र बोस नहीं थे तो और कौन थे? ये सूची जब मैंने देश के एक सबसे बड़े पुलिस अधिकारी रहे सज्जन को पढ़वाई तो वे भी दंग रह गए.

‘गुमनामी बाबा’ के कमरे में अंग्रेज़ी, बंगला व संस्कृत साहित्य की 304 पुस्तकें मिली हैं. वहीं 260 आध्यात्मिक पुस्तकें भी मिली हैं. मेडिकल साइंस पर 118, राजनीति व इतिहास पर 57, रहस्य और तंत्रशास्त्र पर 46, रामायण व महाभारत पर 36, सुभाष चन्द्र बोस पर 34, यात्रा वृतांत ग्रन्थ 33 व ज्योतिष और हस्तरेखा विज्ञान पर 12 पुस्तकें मिली हैं. अब ज़रा अंग्रेज़ी की पुस्तकों के लेखकों नाम और उनके लिखे ग्रंथों की संख्या देखिए, चार्ल्स डिकेंस (51), अलेक्सांद्र सोल्जेनित्सिन (11), विल ड्यूरांट (11), शेक्सपियर का लिखा सम्पूर्ण साहित्य व 9 नाटक, टी. लोबसांग रम्पा (10), वाल्टर स्कॉट (8), अलेक्जेंडर डुमास (8), एरिक वॉन डेनिकेन (4), पीजी वोडहाउस (3), कुलदीप नैयर (3) आदि पुस्तकें उनके बक्सों और अलमारी से निकली हैं. ऐसे उच्च कोटि के विश्वविख्यात साहित्य को पढ़ने वाला कोई भजनानंदी साधु नहीं हो सकता. सभी जानते हैं कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस एक संपन्न व कुलीन परिवार से थे. आईसीएस (वर्तमान में आईएएस) की परीक्षा में, 1920 में उनकी चौथी रैंक आई थी. आज़ादी की लड़ाई लड़ने के लिए 1921 में उन्होंने इतनी बड़ी नौकरी से इस्तीफ़ा दे दिया था.

उपरोक्त साहित्य के अलावा, उनके कमरे से रीडर्स डाइजेस्ट, अमरीकी पत्रिका टाइम, इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ़ इंडिया, ब्लिट्ज, ऑर्गेनाइजर, जुगवाणी, द पायनियर, आज, अमृत प्रभात, अमृत बाज़ार पत्रिका, आनंद बाज़ार पत्रिका, दैनिक जागरण, द स्टेट्समैन, टेलीग्राफ, टाइम्स ऑफ़ इंडिया व अमर उजाला जैसी तमाम प्रतिष्ठित पत्रिकाएँ और अख़बार भी मिले हैं.

उनके बक्से में से उनके परिवार व निकट के लोगों के 110 चित्र मिले हैं. जिनमें नेताजी के माता-पिता का फ्रेम करा हुआ चित्र, मखमली कपड़े में लिपटा हुआ उनके बक्से में रखा था. श्री शक्ति सिंह के अयोध्या स्थित घर, ‘राम भवन’ के जिस कमरे में गुमनामी बाबा रहते थे, उसमें दीवार पर माँ काली का चित्र टंगा था. जिनकी वे रोज़ धूप-बत्ती जला कर पूजा करते थे. रोचक बात यह है कि 23 जनवरी को देश भर में जहां भी उनका जन्मदिन मनाया जाता था उसकी ख़बरों में से सुभाष चंद्र बोस की फोटो निकाल कर संग्रह की गई हैं. इसी बक्से से नेताजी की बचपन से मित्र रहीं और क्रांतिकारी संगठन की नेत्री सुश्री लीला रॉय, पंडित नेहरू, राजेन्द्र प्रसाद और महात्मा गांधी के चित्र भी मिले हैं.

उनके संगीत संग्रह में महिषासुरमर्दनी स्रोत की रिकॉर्डिंग, रवींद्र संगीत, नज़रुल इस्लाम, श्यामा संगीत, केएल सहगल, ज्योतिका रॉय, उस्ताद फ़ैयाज़ ख़ान, पं रवि शंकर का सितार वादन, बिस्मिल्लाह ख़ाँ की शहनाई, नेताजी के बचपन से मित्र और मशहूर गायक दिलीप कुमार रॉय के गाए गीत, हेमंत कुमार के गीत, पन्नालाल घोष, लालन फ़क़ीर आदि की गायकी के रिकॉर्ड भी मिले हैं. इसके अलावा बॉलीवुड की फ़िल्म ‘सुभाष चंद्र बोस’ का पूरा साउंडट्रैक भी मिला है.

इंग्लैंड के टाइपराइटर और जर्मनी की बनी दूरबीन, जापानी क्रॉकरी, दो महंगी घड़ियाँ जिनमें से एक सोने की बनी ओमेगा घड़ी बिल्कुल वैसी है जैसी नेताजी की माँ ने उन्हें जन्मदिन पर भेंट की थी, जिसे वो अक्सर पहना करते थे. दूसरी महंगी घड़ी रोलेक्स की है. गोल फ्रेम के 8 चश्में जिसमें से एक का फ्रेम शायद सफेद सोने का है. इन सब सामानों में सबसे भावुक वस्तु है नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पिता श्री जानकी नाथ बोस की एक पुरानी छतरी जो, उनकी यादगार के प्रतीक रूप में गुमनामी बाबा ने सहेज कर रख रखी थी. इस छतरी को नेता जी के भतीजी ललिता बोस ने पहचाना.

उनके काग़ज़ों में अयोध्या व काशी के विस्तृत नक्शे, भारत के सड़क मार्गों व फौजी ठिकानों के नक्शे, मध्य एशिया, मध्य पूर्व एशिया व दक्षिण पूर्व एशिया के नक्शे, जिन्हें हाथ से बनाया गया था, भी वहाँ बरामद हुए हैं. उनके सबसे प्रिय साथी पवित्र मोहन रॉय की संपत्तियों के नक्शे व एक अन्य साथी अतुल कृष्ण गुप्तो की ढाका में छूट गई संपत्ति के नक्शे आदि भी मिले हैं.

उनके रहन-सहन के स्तर दर्शाते हुए उनके कमरे से नहाने के 75 साबुन मिले हैं, जो महंगे ब्रांड के हैं, जैसे यार्डले, क्यूटीक्यूरा, पियर्स, पोंड्स, लेवेंडर व ड्यू आदि. सबको मालूम है कि सुभाष चंद्र बोस ‘चेन स्मोकर’ थे. वे लगातार सिगरेट पीते थे. उनके सामानों में ‘गोल्ड फ्लैक’ व ‘इंडिया किंग्स’, सिगरेट के कई पैकेट, रोल बनाकर सिगरेट बनाने वाले काग़ज़ के 15 पैकेट व इन काग़ज़ों में भरने वाले तंबाकू के पैकेट और इनको लपेट कर सिगरेट बनाने वाली छोटी सी मशीन, जो इंग्लैंड की बनी हुई है. 3 विदेशी पाइप व तम्बाकू के पैकेट, सिगरेट जलाने वाले लाइटर भी मिले हैं. उनके कमरे में अंग्रेज़ी व बंगला में हस्त लिखित 1683 पत्र भी मिले हैं. दो भारतीय और एक अमरीकी हस्तलेखन विशेषज्ञों ने यह प्रमाणित किया है कि इन पत्रों पर पाई जाने वाली लिखाई 1935-36 की नेताजी सुभाष चंद्र बोस की लिखाई से पूरी तरह मेल खाती है.

पूजा के सामानों में तीन मुखी व छह मुखी रुद्राक्ष की, स्फटिक व तुलसी की 28 मालाएँ मिली हैं. गौमुखी कमण्डल, आचमनी, शिवलिंग, शिवजी व माँ काली के चित्र, मैहर की देवी का चित्र, चंदन की लकड़ियाँ, सिंदूर, आलता, शंख (जिसे कान के पास लाने पर वह गूँजता है) मिला है. गुमनामी बाबा के कमरे से 13 क़मीज़ें, 4 पैंट, 31 बनियान, 31 चड्डी, 58 धोतियाँ, 3 वार्मर, 2 दस्ताने, 2 बरसाती कोट, 30 तौलिये, 1 जैकेट, 2 जोड़ी काले जूते, 1 जोड़ी लाल जूते, चेरी ब्लॉसम की पॉलिश के डिब्बे, जूता चमकाने की क्रीम, खड़ाऊँ, बंदर टोपी, 7 गद्दे, राजस्थानी रज़ाई जिस पर रेशम की कढ़ाई है, चादर व तकिये आदि भी मिले हैं. उनके कमरे से जो तमाम बर्तन व रसोई का सामान मिला है उनमें से कुछ विदेशों में निर्मित हैं जो उनके लाइफस्टाइल को दर्शाता है. चूँकि वे होम्योपैथी के अच्छे जानकर थे इसलिए इसकी व दूसरी तमाम दवाइयां भी मिली हैं. अब आप ख़ुद ही सोच लीजिए कि गुमनामी बाबा अगर नेताजी सुभाष चंद्र बोस नहीं थे तो और कौन थे?

-भारत एक्सप्रेस 



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