Bharat Express DD Free Dish

यहां रहते हैं ऐसे लोग जो मुर्दों के साथ बिताते हैं जीवन, किसी के अंतिम संस्कार के लिए सालों तक करते हैं इंतजार

Indonesian Tribes: इंडोनेशिया के पपुआ प्रांत के लोग अपने परिवार के मरे हुए लोगों के शवों को कई-कई महीनों तक न सिर्फ अपने साथ रखते हैं बल्कि उन्हें सामान्य लोगों की तरह खाना भी खिलाते हैं.

indonesian tribes
Vijay Ram Edited by Vijay Ram
  • नमिता वर्मा

Indonesian Tribes: आपने कई ऐसी जनजाति के बारे में सुना होगा जो अपनी अनोखी परंपराओं के लिए जाने जाते हैं. कहीं मुर्दों को खाने की तो कहीं पर मुर्दों के साथ त्योहार बनाने की. लेकिन एक जनजाति ऐसी है जिनकी परंपराओं के बारे में जानकर आपके होश उड़ जाएंगे. हम बात कर रहे हैं इंडोनेशिया के पपुआ प्रांत में दानी जनजाति की. इनकी परंपराएं किसी हॉरर फिल्म जैसी लगती हैं. यहां लोग अपने मृत रिश्तेदारों का तुरंत अंतिम संस्कार नहीं करते. वे शवों को धुएं से संरक्षित कर ममी बनाते हैं और कई-कई रातें उन्हीं के पास बिताते हैं. यह परंपरा सैकड़ों साल पुरानी है और अब भी निभाई जाती है.

दानी जनजाति के लोग अपने मृत बुजुर्गों के शवों को ममी बनाकर रखते हैं. पापुआ के वोगी गांव में बने छोटे-छोटे झोपड़ों में ये ममियां सुरक्षित रखी जाती हैं. आदिवासी मानते हैं कि ऐसा करने से उन्हें पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है. ममियां सजाई जाती हैं और उनकी सुरक्षा के लिए लोग रात वहीं गुजारते हैं.

इन आदिवासियों ने अपने 250 साल पुराने कबीले के सरदारों के शवों को भी संरक्षित रखा है. इन ममियों को धुएं से काला कर रखा गया है ताकि वे लंबे समय तक खराब न हों. इन्हें सुअर के दांतों, पक्षियों के पंखों और खास सजावट के सामान से सजाया जाता है. जिस झोपड़ी में ममी रखी जाती है, उसे ‘होनाई’ कहते हैं.

ममी बनाने की प्रक्रिया बेहद जटिल होती है. पहले शव को धूप में सुखाया जाता है. फिर उसे गुफा में छिपाकर गर्म धुएं में रखा जाता है. शव में छेद कर उसके अंदर का वसा निकाला जाता है. पूरी प्रक्रिया में महीनों का समय लगता है. इस वजह से अंतिम संस्कार सालों तक टल जाता है.

दानी जनजाति का विश्वास है कि ममीकृत शव उनके लिए शुभ होते हैं. उनका मानना है कि मृत पूर्वजों को अपने पास रखने से समृद्धि और संपन्नता आती है. इसलिए ममी को भ्रूण जैसी अवस्था में झोपड़ी में रखा जाता है और उसकी सुरक्षा के लिए लोग वहां रात गुजारते हैं.

आधुनिक युग में भी यह परंपरा पापुआ के सुदूर गांवों में जीवित है. पर्यटक भी इसे देखने पहुंचते हैं. हालांकि बाहरी लोगों को ममी को छूने या ज्यादा नजदीक जाने की अनुमति नहीं होती. यह आदिवासियों के लिए आस्था और सम्मान का विषय है, जो उनके जीवन का अहम हिस्सा है.

ये भी पढ़ें: चैटबॉट्स से कभी न शेयर करें ये बातें, वरना करना पड़ सकता है समस्याओं का सामना

Also Follow Bharat Express on Instagram 

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read