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‘काली-मोटी’ पत्नी को गोरी बनाने के लिए उतारे कपड़े, डाला केमिकल फिर लगाई आग; कोर्ट ने किया अंतिम फैसला

Udaipur Murder Case: राजस्थान के उदयपुर की जिला अदालत ने पत्नी की खौफनाक हत्या करने वाले पति के केस में अंतिम फैसला सुना दिया है. आइये जानें क्या है मामला और कोर्ट ने क्या फैसला दिया है?

Udaipur Murder Case Sentences Husband to Death

Udaipur Murder Case: साल 2017 में राजस्थान के उदयपुर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई थी. यहां एक पति को अपनी पत्नी को जिंदा जलाकर मार डाला था. अब कोर्ट ने इस मामले में अंतिम फैसला कर दिया है. यह मामला 2017 का है, जब दोषी किशनदास ने अपनी पत्नी लक्ष्मी को केवल इसलिए जला डाला क्योंकि वह उसे ‘काली’ और ‘मोटी’ कहकर अपमानित करता था. इस जघन्य अपराध ने समाज की आत्मा को झकझोर कर रख दिया थी. अदालत ने इस फैसले को ‘दुर्लभ’ और ‘क्रूरतम’ श्रेणी में रखा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.

गोरी होने के लिए दिया था कैमिकल

घटना 24 जून 2017 की है. आरोपी पति किशनदास ने अपनी पत्नी लक्ष्मी को गोरी बनाने के बहाने जिंदा जला दिया था. किशनदास ने लक्ष्मी को एक केमिकल दिया और कहा कि यह दवा है, जिसे पूरे शरीर पर लगाने से वह गोरी हो जाएगी. इसके बाद उसने माचिस की तीली जलाकर उसके शरीर में आग लगा दी. लक्ष्मी को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई.

‘काली और मोटी’ कहता था

किशनदास अपनी पत्नी लक्ष्मी को पसंद नहीं करता था और उसे ‘काली और मोटी’ कहकर चिढ़ाता था. उसने अपनी पत्नी को गोरी बनाने के बहाने जिंदा जलाने की कोशिश की. किशनदास के खिलाफ 14 गवाह और 36 दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे, जिनसे उसका दोष सिद्ध हुआ. अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने किशनदास को मौत की सजा सुनाई और 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया.

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न्यायालय का अंतिम फैसला

उदयपुर कोर्ट (Udaipur Court) के जज राहुल चौधरी ने किशनदास को मौत की सजा सुनाते हुए कहा कि आरोपी ने समाज की आत्मा को झकझोरने वाला अपराध किया है, इसलिए उसे सजा-ए-मौत दी गई है. अदालत ने कहा कि ऐसी घटनाएं बार-बार न हों, इसके लिए दोषी को सजा-ए-मौत देना ही एक विकल्प है। किशनदास को जल्द ही फांसी पर लटका दिया जाएगा.

क्रूरता और बर्बरता का कोई स्थान नहीं

उदयपुर अदालत का यह फैसला न्याय की एक मिसाल है. जज राहुल चौधरी ने दोषी को मौत की सजा सुनाकर यह साफ कर दिया है कि समाज में क्रूरता और बर्बरता का कोई स्थान नहीं है. इस मामले में 14 गवाहों और 36 दस्तावेजों ने दोषी के अपराध को सिद्ध किया, जिसने दिखाया कि न्यायपालिका सबूतों के आधार पर ही सख्त से सख्त कार्रवाई करने में सक्षम है. यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार को न्याय (Udaipur Kishandas and Lakshmi case) दिलाता है, बल्कि उन सभी लोगों के लिए एक चेतावनी भी है जो महिलाओं को अपमानित करते हैं या उनके साथ हिंसा करते हैं.



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