ईरान का अमेरिका को सीधा अल्टीमेटम, गालिबफ बोले- सैन्य ताकत से बनाएंगे दबाव
Mohammad Bagher Ghalibaf: सऊदी अरब पर हूती हमलों के बाद मध्य पूर्व में संघर्ष अब और तेज हो गया है. इस हमले के बाद सऊदी अरब ने बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट से होने वाले अपने तेल व्यापार को रोक दिया है. इसी बीच ईरान ने एक बार फिर यह दोहराया कि वो अभी होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोलने वाला.
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने साफ कहा है कि जब तक तेहरान की शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक होर्मुज को दोबारा खोलने की कोई संभावना नहीं है. उनका बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें फिर तेज हो रही हैं.
सैन्य ताकत के जरिए दबाव बनाएगा ईरान
गालिबफ ने ईरानी संसद में कहा कि ईरान के लिए सैन्य कार्रवाई और बातचीत में से किसी एक को चुनने की स्थिति नहीं है. उनके मुताबिक, तेहरान को जरूरत के मुताबिक दोनों रास्तों पर आगे बढ़ना होगा. उन्होंने कहा कि ईरान पहले अपनी सैन्य ताकत के जरिए दबाव बनाएगा और जब उसे मैदान में बढ़त हासिल होगी, तब कूटनीति के जरिए उस स्थिति को मजबूत करने की कोशिश की जाएगी.
ईरानी संसद अध्यक्ष ने कहा कि कूटनीतिक मोर्चे पर तेहरान का रुख पूरी तरह स्पष्ट है और उसकी शर्तें मध्यस्थों के जरिए दूसरे पक्ष तक पहुंचाई जा चुकी हैं. गालिबफ के मुताबिक, जब तक ईरानी लोगों के अधिकारों को मान्यता नहीं दी जाती और अमेरिका की ओर से किए गए वादों को लागू नहीं किया जाता, तब तक न तो बातचीत की पुरानी स्थिति बहाल होगी और न ही होर्मुज जलडमरूमध्य को खोला जाएगा.
अमेरिका के सामने ईरान की 7 शर्तें
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने बताया है कि तेहरान ने अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करने के लिए सात शर्तें रखी हैं. ये शर्तें कतर के माध्यम से वॉशिंगटन तक पहुंचाई गई हैं और ईरान अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है.
रेजाई के मुताबिक, ईरान की प्रमुख मांगों में सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना, विदेशों में फ्रीज किए गए ईरानी फंड को जारी करना और ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी को खत्म करना शामिल है. इसके अलावा ईरान अमेरिका से अपने आंतरिक मामलों में दखल बंद करने और ईरानी क्षेत्र पर अमेरिकी हमले रोकने की भी मांग कर रहा है.
रेजाई ने कहा कि अगर अमेरिका इन शर्तों को स्वीकार करता है तो बातचीत का रास्ता खुल सकता है. वहीं, अगर वॉशिंगटन इन मांगों को खारिज करता है तो उन्होंने ईरान के ‘निर्णायक युद्ध’ के लिए तैयार होने की चेतावनी दी है.
कतर बना अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थ
अमेरिका और ईरान के बीच सीधे संवाद की स्थिति नहीं होने के कारण कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. रेजाई के अनुसार, कतर ने ईरान की शर्तें अमेरिका तक पहुंचा दी हैं और अब तेहरान ट्रंप प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है.
पिछले समझौते की समयसीमा खत्म होने के बाद कतर और पाकिस्तान दोनों अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दोबारा शुरू कराने की कोशिश कर रहे हैं. जून में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हुआ था, लेकिन बाद में उसकी समयसीमा खत्म हो गई और तनाव फिर बढ़ गया.
होर्मुज पर अड़ा है ईरान
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान का रुख इस पूरे विवाद का सबसे अहम हिस्सा बन गया है. यह जलमार्ग खाड़ी क्षेत्र से तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की आवाजाही के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. ऐसे में यहां लंबे समय तक तनाव रहने से सिर्फ ईरान और अमेरिका ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ सकता है. हाल के हफ्तों में क्षेत्रीय तनाव के बीच तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं.
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गालिबफ ने रविवार को दोहराया कि ईरान अपनी शर्तें पूरी हुए बिना होर्मुज को नहीं खोलेगा. दूसरी ओर, रेजाई ने कहा है कि तेहरान युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत का रास्ता खुला रखे हुए है, लेकिन वह किसी दबाव में शर्तें बदलने के लिए तैयार नहीं है.
ईरान ने अमेरिका के संभावित हमले की भी दी चेतावनी
रेजाई ने अमेरिका की ओर से किसी नए सैन्य हमले की संभावना से भी इनकार नहीं किया है. उन्होंने दावा किया कि ईरान ने अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव किया है और अब उसकी तैयारी खाड़ी से लेकर ओमान की खाड़ी और अरब सागर तक अमेरिकी सैन्य ठिकानों और नौसैनिक संपत्तियों को ध्यान में रखकर की गई है.
-भारत एक्सप्रेस
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