नेपाल (Nepal) में इन दिनों हालात बेहद तनावपूर्ण हैं. Gen G के नेतृत्व में हो रहे उग्र प्रदर्शन ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है. संसद, सरकारी दफ्तर, होटल, बाजार कुछ भी सुरक्षित नहीं बचा है. प्रदर्शनकारियों ने हिंसा की ऐसी लहर चलाई कि पीएम केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देकर देश छोड़ना पड़ा. बात यहीं नहीं रुकी, पूर्व प्रधानमंत्री पर हमला हुआ और उनकी पत्नी को आग के हवाले कर दिया गया. विदेश मंत्री आरजू राणा देउबा लापता हैं. हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अब नेपाल राजशाही की वापसी की मांग जोर पकड़ने लगी है.
लोकतंत्र पर असंतोष
नेपाल (Nepal) में लंबे समय से लोकतंत्र को लेकर असंतोष रहा है. बीते 17 सालों में यहां 14 बार सरकारें बदलीं. भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और राजनीतिक उथस पुथल ने युवाओं को सड़कों पर ला दिया है. सोशल मीडिया पर बैन ने आग में घी का काम किया. अब लोग पूर्व राजा ज्ञानेंद्र विक्रम को फिर से देश की बागडोर देने की बात कर रहे हैं.
एक जून 2001 की काली रात
एक जून 2001 की रात नेपाल (Nepal) के नारायणहिती राजमहल में एक निजी शाही डिनर रखा गया था. परिवार में किसी को क्या पता था कि ये रात शाही परिवार के लिए आखिरी रात होने वाली है. माहौल शांत था, परिवार के लोग मौजूद थे लेकिन कोई सुरक्षाकर्मी या स्टाफ नहीं था. क्राउन प्रिंस दीपेंद्र ने उस रात काफी शराब पी ली थी.
जब उन्हें नशे में देखा गया तो आराम करने के लिए कमरे में भेज दिया गया. कुछ देर बाद दीपेंद्र सैन्य वर्दी में हथियारों से लैस होकर वापस लौटे. उस समय उनके हाथ में MP5K सबमशीन गन, M-16 राइफल और एक पिस्तौल थी. बिना किसी चेतावनी के उन्होंने शाही परिवार पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं.

हमले में मारे गए थे 9 लोग
राजा बीरेन्द्र, रानी ऐश्वर्या, भाई निरजन, बहन श्रुति समेत कुल 9 लोग इस खौफनाक हमले में मारे गए. दीपेंद्र ने खुद को भी गोली मार ली और कोमा में चले गए थे. इसी दौरान ऐलान किया गया कि दीपेंद्र अगले राजा होंगे लेकिन 54 घंटे बाद उनकी मौत हो गई. इसके बाद उनके चाचा ज्ञानेंद्र नेपाल के राजा बने.

नारायणहिती पैलेस क्यों है खास?
नारायणहिती पैलेस सिर्फ एक इतिहास नहीं है बल्कि नेपाल की राजनीति का प्रतीक भी है. 383,850 वर्ग मीटर में फैले इस महल में 52 कमरे हैं जिनका नाम नेपाल के अलग-अलग जिलों पर रखा गया है. महल का नाम भी खास है ‘नारायण’ यानी भगवान विष्णु और ‘हिटी’ यानी पानी की टोंटी. महल में सोने का रथ है जो ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने राजा महेंद्र को तोहफे में दिया था. रॉयल क्राउन में 730 हीरे और 2 हजार से ज्यादा मोतियां जड़ी हैं. महल की दीवारों पर सोने-चांदी की नक्काशी और बेशकीमती झूमर लगे हैं.

राजशाही की वापसी की चर्चा
लेकिन इस महल की खूबसूरती जितनी मशहूर है उसकी बदकिस्मती भी उतनी ही चर्चित है. 2008 में लोकतंत्र लागू होने के बाद इस महल को म्यूजियम बना दिया गया. लेकिन आज जब नेपाल फिर से उथल-पुथल के दौर गुजर रहा है तो नारायणहिती पैलेस और राजशाही की वापसी की चर्चा फिर से तेज हो गई है.
राजशाही की उम्मीद में नेपाल की जनता
नेपाल की जनता एक बार फिर अपनी पुरानी राजशाही की ओर देख रही है शायद इस उम्मीद में कि वहां से उसे सुरक्षा और सम्मान मिलेगा. लेकिन यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि नेपाल अपने राजशाही इतिहास को चुनेगा या फिर कोई नई राह चुनेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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