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कौन हैं सुशीला कार्की जिन्हें नेपाल की कमान दिए जाने की हो रही है बात, प्रधानमंत्री बनने से पहले उन्होंने क्या कहा?

सुशीला कार्की (Sushila Karki) नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रही हैं. उन्होंने 2016 में सुप्रीम कोर्ट की कमान संभाली थी.

Sushila Karki: नेपाल में बीते कुछ दिनों से चल रही उथल पुथल अब थोड़ी शांत होती दिख रही है. सोशल मीडिया पर बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ Zen-G युवाओं के जबरदस्त प्रदर्शन के बाद पीएम केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया. हालांकि उनके इस्तीफे के बाद भी देश में हिंसा जारी रही जिससे हालात और बिगड़ गए. सेना ने मोर्चा संभालते हुए पूरे देश में कर्फ्यू लगा दिया.

पूर्व मुख्य न्यायधीश सुशीला कार्की ने क्या कहा?

अब इस पूरे राजनीतिक संकट के बीच Gen-G प्रतिनिधियों ने नेपाल की अंतरिम सरकार के लिए नया नाम तय कर लिया है. उन्होंने पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की (Sushila Karki) को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाने का ऐलान किया है. 71 साल की कार्की ने पहली बार इस पर प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि वो राष्ट्रहित में काम करने को तैयार हैं. उन्होंने कहा कि नेपाली युवाओं ने उन पर जो भरोसा जताया है उससे वो बेहद भावुक और अभिभूत हैं. सुशीला कार्की (Sushila Karki) ने साफ कहा,

“जेन-जी समूह ने मुझ पर थोड़े समय के लिए सरकार का नेतृत्व करने का भरोसा जताया है. मैं राष्ट्रहित में काम करने के लिए तैयार हूं.”

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सेना प्रमुख के साथ बैठक

अब Gen-Z प्रतिनिधियों की सेना प्रमुख के साथ एक अहम बैठक होने वाली है जिसमें राष्ट्रपति रामचंद पौडेल के भी बुलाया गया है. माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद सुशीला कार्की को औपचारिक रूप से मंजूरी मिल जाए. हालांकि कुछ लोगों के बीच अभी भी मतभेद हैं लेकिन आंदोलनकारी युवाओं के बीच इस नाम को लेकर सहमति बनती दिख रही है.

कौन हैं सुशीला कार्की?

सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रही हैं. उन्होंने 2016 में सुप्रीम कोर्ट की कमान संभाली थी. करियर की शुरुआत एक शिक्षक के रूप में करने वाली कार्की भ्रष्टाचार और राजनीतिक हस्तक्षेप के खिलाफ अपने सख्त रुख के लिए जानी जाती हैं. 2006 में वे संवैधानिक मसौदा समिति की सदस्य रहीं.

2009 में सुप्रीम कोर्ट की ऐड-हॉक जज नियुक्त हुईं और अगले ही साल स्थायी जज बन गईं. 2016 में उन्हें पहले कार्यवाहक और फिर स्थायी मुख्य न्यायाधीश का पद मिला. वाराणसी स्थित बीएचयू से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर करने वाली कार्की की नियुक्ति नेपाल में महिलाओं की बराबरी और संवैधानिक अधिकारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम मानी जाती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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