सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने महाराष्ट्र में 2023 में अकोला में हुए दंगों के मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है. साथ ही कोर्ट ने सीनियर अधिकारी की अध्यक्षता में एसआईटी गठित करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने गठित एसआईटी में हिंदू और मुस्लिम दोनों अधिकारियों को शामिल करने का आदेश दिया है.
कोर्ट का क्या आदेश है?
कोर्ट (Supreme Court) ने तीन महीने में जांच कर 11 नवंबर तक रिपोर्ट देने को कहा है. जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने यह आदेश दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में टिपण्णी करते हुए कहा कि पुलिस की वर्दी पहनने के बाद भी अधिकारी को धर्म और जाति से ऊपर उठकर केवल कानून के मुताबिक अपनी ड्यूटी निभानी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि कानून व्यवस्था संभालने वाले अधिकारी अगर अपने कर्तव्य का पालन धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव के साथ करेंगे, तो यह न्याय प्रणाली और लोकतंत्र दोनों के लिए खतरा है. कोर्ट (Supreme Court) ने मोहम्मद अफजल मोहम्मद शरीफ की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है.
दायर याचिका क्या है?
दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि मई 2023 में महाराष्ट्र के अकोला शहर के पुराने इलाके में भड़की साम्प्रदायिक हिंसा की निष्पक्ष जांच नही की गई है. 13 मई 2023 को हुए इस दंगे में विलास महादेव राव गायकवाड़ की मौत हो गई थी और कई लोगों घायल हो गए थे. याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि दंगों की सही जांच कराई जाए और दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सिविल और क्रिमिनल कार्रवाई की जाए, क्योंकि उन्होंने ड्यूटी में गंभीर लापरवाही बरती और जानबूझकर मामले को दबाया जा रहा है.
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याचिकाकर्ता ने इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन हाई कोर्ट के नागपुर बेंच ने 25 जुलाई 2024 को राहत देने से इनकार कर दिया था. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. जिसकी याचिका पर कोर्ट ने यह आदेश दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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