Nina Kutina and daughters return to Russia: सुप्रीम कोर्ट ने इजरायली नागरिक डोर श्लोमो गोल्डस्टीन की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है. डोर श्लोमो गोल्डस्टीन ने गोकर्ण में मिले रूसी बच्चों के कथित पिता होने का दावा किया था. गोल्डस्टीन ने अदालत से अनुरोध किया था कि केंद्र को नाबालिग बच्चों को तुरंत निवार्सित न करने का निर्देश दिया जाए.
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से पूछा-जब आपके बच्चे गुफा में रह रहे थे, उस दौरान आप क्या कर रहे थे? जिसके बाद याचिकाकर्ता अपनी याचिका को वापस ले लिया.
जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह देश एक स्वर्ग बन गया है. कोई भी आता है और रहता है. दो नाबालिग रूसी लड़कियों का पिता होने का डोर श्लोमो गोल्डस्टीन दावा कर रहा था.
नीना कुटीना और बेटियों की रूस वापसी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
गोल्डस्टीन जो कि दूसरी बेटी का पिता है, उसकी वकील ने कहा था कि याचिकाकर्ता ने भारत छोड़ने से पहले लंबे समय तक तीनों मां बेटी की देखभाल की है. हालांकि महिला द्वारा कोर्ट से अनुरोध किया गया था कि उसे उसके बच्चों के साथ रूस वापस जाने दिया जाए.
याचिकाकर्ता ने कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी. हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक रूसी महिला और उसकी दो नाबालिग बेटियों की वापसी के लिए यात्रा दस्तावेज जारी करने की अनुमति दे दिया था.
नीना कुटीना अपनी बेटियों के साथ यहां गुफा के अंदर कई महीनों से रह रही थी. उसकी एक बेटी की उम्र 6 और 7 साल थी. नीना कुटीना के पास भारत में रहने के लिए वैध दस्तावेज नहीं थे. उन्हें गुफा से निकालकर बेंगलुरु से करीब 76 किमी दूर टुमकुर स्थित विदेशी महिलाओं के लिए बनाए गए एक रिस्ट्रिक्शन सेंटर भेज दिया गया था.
जुलाई में केंद्र सरकार ने अदालत को बताया था कि मां और बेटियों को तुरंत रूस वापस नहीं भेजा जा सकता, क्योंकि दूसरी बेटी के पास उसके जन्म का भी कोई उचित रिकॉर्ड नहीं है. न ही उनके पास कोई यात्रा दस्तावेज है.
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-भारत एक्सप्रेस
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