Chhoti Diwali 2025: दिवाली का पर्व पांच दिनों तक चलने वाला एक बड़ा उत्सव है. धनतेरस के बाद जब पूरा देश रोशनी से नहाने की तैयारी करता है, तभी आती है छोटी दिवाली, जिसे नरक चतुर्दशी या रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है. इस साल छोटी दिवाली का त्योहार 19 अक्टूबर 2025 को मनाया जा रहा है. देशभर में आज सुबह से ही लोग विशेष पूजा, अभ्यंग स्नान और दीपदान की तैयारियों में जुटे हैं.
भगवान हनुमान, मां काली और यमराज की पूजा का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी दिवाली के दिन भगवान हनुमान और मां काली की पूजा करने का विशेष फल मिलता है. शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि इस दिन यमराज की भी आराधना करनी चाहिए, ताकि व्यक्ति को अकाल मृत्यु का भय न रहे.
मान्यता है कि इस दिन किया गया दीपदान और स्नान सारे पापों को मिटा देता है और व्यक्ति को उत्तम स्वास्थ्य और सौभाग्य प्रदान करता है.
पूजा का सही समय और विधि
इस वर्ष कार्तिक मास की चतुर्दशी तिथि 19 अक्टूबर की दोपहर 1:51 बजे से शुरू होकर 20 अक्टूबर की दोपहर 3:00 बजे तक रहेगी. अभ्यंग स्नान का शुभ मुहूर्त सुबह 5:12 से 6:25 बजे तक रहेगा, जबकि पूजा का शुभ समय शाम 5:47 बजे से रात 9 बजे तक माना गया है. कहा जाता है कि सूर्यास्त के बाद ही छोटी दिवाली की पूजा करनी चाहिए.
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क्यों जलाए जाते हैं 14 दीपक?
छोटी दिवाली पर 14 दीपक जलाने की परंपरा बेहद खास मानी जाती है. हर दीपक का एक अलग महत्व बताया गया है-
- एक दीपक यमराज के नाम से दक्षिण दिशा में रखा जाता है.
- दूसरा दीपक मां काली के लिए जलाया जाता है.
- तीसरा दीपक भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित होता है.
- चौथा दीपक घर के मुख्य द्वार पर रखा जाता है, ताकि लक्ष्मी जी का स्वागत हो.
- पांचवां दीपक पूर्व दिशा में, छठवां रसोई घर में, सातवां छत पर और आठवां तुलसी के पास रखा जाता है.
- नौवां दीपक सीढ़ियों या बालकनी के पास रखना शुभ माना गया है.
- बाकी दीपक घर के इष्ट देवताओं और अन्य देवी-देवताओं के लिए जलाए जा सकते हैं.
कहा जाता है कि छोटी दिवाली की रात जितने अधिक दीपक जलाए जाते हैं, घर में उतनी ही अधिक सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का वास होता है. इसलिए इस दिन 14 से कम दीपक नहीं जलाने चाहिए.
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