बिहार में जेल में बंद प्रत्याशी
Bihar Election Jail Politics: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का रणभूमि इस बार जेल की सलाखों के पीछे से भी गरम है. मोकामा में हुई दुलारचंद यादव की हत्या के बाद JDU नेता यानी NDA के उम्मीदवार अनंत सिंह को गिरफ्तार किया गया. उसके बाद से ही उनके प्रचार के लिए ललन सिंह, सम्राट चौधरी कूट पड़े. बीजेपी पर आरोप लगा की वह अपराधियों को बढ़ावा दे रही है. हालांकि, सच तो यह है कि इस चुनावी दलदल में कोई दूध का धुला नहीं है. ऐसा इसलिए नहीं की NDA अनंत सिंह का समर्थन कर रही है. बल्कि, इसलिए की वह अकेले उम्मीदवार नहीं है जो जेल से चुनाव लड़ रहे हैं और आला नेता उनके लिए वोट मांग रहे हैं. महागठबंधन और RJD की लिस्ट तो इससे लंबी है.
जेल में बंद उम्मीदवार और प्रचार
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Election 2025) में कुछ उम्मीदवार जेल में बंद हैं या प्रचार के दौरान पकड़े गए हैं. इसके बाद भी वह चुनाव लड़ रहे हैं. इससे पार्टियों पर कोई खास असर नहीं पड़ रहा. पार्टियां उनके लिए जोर-शोर से प्रचार कर रही हैं. सबसे खास बात यह कि इसमें NDA और महागठबंधन दोनों शामिल हैं.
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रीतलाल यादव (Ritlal Yadav) दानापुर से RJD उम्मीदवार
- रंगदारी के मामले में भागलपुर जेल में बंद
- बिल्डर से 50 लाख रुपये मांगने और धमकाने का आरोप
- 17 अप्रैल 2025 को सरेंडर किया
- चुनाव के जमानत याचिका हाईकोर्ट में खारिज हुई
- पत्नी, बेटी और पूरा परिवार प्रचार कर रहा है
- लालू यादव ने खुद रोड शो किया
- इनका मुकाबला NDA के रामकृपाल यादव से है
अनंत सिंह (Anant Singh) से मोकामा JDU उम्मीदवार
- दुलारचंद यादव हत्याकांड में मुख्य आरोपी बनाया गया है.
- गिरफ्तारी के बाद से बेऊर जेल में रिमांड पर हैं.
- पत्नी नीलम देवी प्रचार संभाल रही हैं.
- सम्राट चौधरी और ललन सिंह जैसे नेता भी वोट मांग रहे हैं.
- गठबंधन अगड़ी वोट बचाने में लगा है.
- मुकाबला सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी और जन सुराज के पीयूष प्रियदर्शी से है.
सत्येंद्र साह (Satyendra Shah) सासाराम से RJD उम्मीदवार
- नामांकन के तुरंत बाद गिरफ्तारी हुई थी.
- 21 साल पुराने डकैती के केस में झारखंड पुलिस का एक्शन.
- पत्नी और मां प्रचार कर रही हैं.
- पार्टी की ओर से पूरी मदद मिल रही है.
- मुकाबला NDA की स्नेह लता (उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी) और BSP के डॉ. अशोक कुमार से है.
क्यों लड़ पा रहे हैं Bihar Election 2025?
चुनावों में पार्टियों को बाहुबलियों की जरूरत होती है. चुनाव जीतना उनके लिए प्रथम प्राथमिकता होती है. इस कारण वह दागियों पर दांव लगाने से पीछे नहीं हटते हैं. हालांकि, हमारे देश के कानून में भी ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने से नहीं रोका गया है. भारत के कानून में जेल में बंद व्यक्ति चुनाव लड़ सकता है बशर्ते दोषी न ठहराया गया हो और उसे 2 साल या उससे ज्यादा सजा न मिली हो.
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पार्टियों के लिए जीत की संभावना (Bihar Election Jail Politics)
एक ओर जहां राजद (RJD) के सुप्रीमो लालू यादव स्वयं रंगदारी के आरोप में जेल में बंद रीतलाल यादव के लिए रोड शो कर रहे हैं. वहीं NDA भी हत्या के आरोपी बाहुबली अनंत सिंह के लिए मैदान में डटी हुई है. सत्येंद्र साह जैसे उम्मीदवार तो नामांकन के तुरंत बाद गिरफ्तार हुए हैं. हालांकि, उन्हें पार्टी का पूरा समर्थन हासिल है. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जेल में बंद प्रत्याशियों का मैदान में होना एक बार फिर भारतीय राजनीति के अपराधीकरण को उजागर करता है. बड़े नेताओं का प्रचार करना यह दिखाता है कि पार्टियों के लिए आपराधिक रिकॉर्ड से अधिक वोट बैंक और जीत की संभावना मायने रखती है.
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