1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बलवंत खोखर की ओर से दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट 17 नवंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. बलवंत खोखर ने 21 दिन के लिए फरलो की मांग की हैं.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बलवंत खोखर की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को अवगत कराया गया था कि आवेदक फरलो के आवेदक पर शीघ्रता से विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद जेल अधिकारियों ने 26 सितंबर 2024 को ही आवेदन खारिज कर दिया था.
बलवंत खोखर ने हाई कोर्ट के फैसले को SC में दी चुनौती
बलवंत खोखर ने 17 दिसंबर 2018 के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी. खोखर के साथ सज्जन कुमार को इस मामले में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था और वह आजीवन कारावास की सजा काट रहा है और तिहाड़ जेल में बंद है. दिल्ली कैंट मामले में कोर्ट ने दोषी करार दिया था.
खोखर ने अपने आवेदन में दावा किया कि वह 66 वर्ष के वरिष्ठ नागरिक है और शारीरिक रूप से विकलांग है, निचले अंग में 54 प्रतिशत स्थायी विकलांगता है और मधुमेह, सीए के साथ उच्च रक्तचाप और डिसलिपिडीमिया जैसी विभिन्न बीमारियों से पीड़ित है. 10 साल की सजा पाने वाले पूर्व विधायक महेंद्र यादव की मंडोली जेल में कोविड से मौत हो गई थी.
सज्जन कुमार और बलवंत खोखर 17 दिसंबर 2018 को दोषी ठहराए जाने के बाद से तिहाड़ जेल में बंद है. खोखर की उम्रकैद की.सजा को दिल्ली हाई कोर्ट ने 2018 में बरकरार रखा था, जबकि 2013 में ट्रायल कोर्ट द्वारा सज्जन कुमार को बरी करने के फैसले को पलट दिया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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