बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पर पहाड़ बनकर टूटे हैं. इस चुनाव में राजद का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा, जिसके चलते पार्टी को 25 सीटों पर संतुष्टि जतानी पड़ी. वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को 202 सीटों की भारी बहुमत हासिल हुई है. अब इसके बाद सवाल ये है कि कभी CM बनने का सपना देख रहे राजद के नेता तेजस्वी यादव क्या विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने लायक सीट पा चुके हैं.
क्या कहता है नियम?
देश के किसी भी सदन में नेता प्रतिपक्ष बनने के लिए कम से कम 10 फीसदी का वोट प्रतिशत चाहिए होता है. हालांकि इस चुनाव में राजद को 243 विधानसभा सीटों में से 25 सीट मिली हुई है, यानी 243 का 10 फिसदी 24.3 सीटें होती हैं. अब जो भी बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का दावा पेक्ष करे, उसके पास कम से कम 24 सीटों से ज्यादा सीटें होनी चाहिए.
1952 में बना था नियम
नेता प्रतिपक्ष के चुनाव का मामला बेहद पुराना है. 1952 में पहले आम चुनाव के बाद लोकसभा का गठन हुआ और तब 10% सीटें मिलने के बाद नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिए जाने का नियम आया था. इसके लिए तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष जी. वी. मावलंकर ने नियम तय किया था कि नेता प्रतिपक्ष के लिए 10% सीटें होनी चाहिए. लेकिन इसके बाद 1977 में नेता प्रतिपक्ष वेतन भत्ता कानून बनाया गया. इसमें कहा गया कि सरकार के विरोधी दल का नेता उसे माना जाएगा जिसकी संख्या सबसे ज्यादा होगी. हालांकि अब भी विरोधी दल का नेता 10% सीटें या सबसे ज्यादा सीटें लाने वाली पार्टी में से ही होता है.
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बिहार विधानसभा चुनाव के बाद राजद को अपनी रणनीतियों में झांकने की जरूरत हैं, क्योंकि पिछले चुनाव के मुकाबले राष्ट्रीय जनता दल का सबसे निराशाजनक प्रदर्शन 2010 में 22 सीटों के साथ और इस चुनाव में 25 सीटों के साथ दिखा है.
_भारत एक्सप्रेस
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