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भारत स्पोर्ट्स में वर्चस्व कायम कर रहा, यह पीएम मोदी की खेलो इंडिया जैसी पहल का असर: सांसद दिनेश शर्मा

राज्यसभा सांसद एवं यूपी के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा (Dr Dinesh Sharma) ने जीडी गोयंका स्कूल में आयोजित खेल महोत्सव में कहा कि भारत ने खेल के क्षेत्र में दुनिया में वर्चस्व कायम करना आरंभ कर दिया है.

Dr Dinesh Sharma

राज्यसभा सांसद एवं यूपी के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा (Dr Dinesh Sharma) ने जीडी गोयंका स्कूल में आयोजित खेल महोत्सव में कहा कि भारत ने खेल के क्षेत्र में दुनिया में वर्चस्व कायम करना आरंभ कर दिया है. इसके पीछे का बड़ा कारण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सांसद खेल प्रतियोगिता ओर खेलो इंडिया जैसी पहल है. इन प्रतियोगिताओं ने प्रतिभाओं को सामने लाने का काम किया है. इन प्रतियोगिताओं के जरिए सामने आए खिलाडी देश का परचम लहरा रहे हैं. आज खेलोगे कूदोगे बनोगे महान  का समय है. धोनी, सचिन, पीटी ऊषा, मिल्खा जैसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी देश के लोगों के दिलो में बसे हुए हैं.

सांसद खेल प्रतियोगिता के तहत लखनऊ के मोहनलालगंज संसदीय क्षेत्र में तमाम खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की गई है. आज की खेल प्रतियोगिता का शुभारंभ करते हुए सांसद ने कहा कि  आज यहां पर हो रही खेल प्रतियोगिता में कुछ बच्चे विजयी होंगे पर जो आज नहीं जीत सके उन्हे निराश नहीं होना है. बच्चों को किताबी कीड़ा नहीं बनाया जाना चाहिए. उन पर पढाई के लिए दबाव नहीं बनाना चाहिए. खेल और पढाई के बीच में संतुलन होना चाहिए.

अलग-अलग रहने के कारण परिवार व्यवस्था विखंडित हो रही

सांसद डॉ दिनेश शर्मा ने कहा कि  माता पिता के सामने बच्चों का अच्छा प्रदर्शन करना गौरव का क्षण होता है. आने वाले समय में ये क्षण स्मृतियों रहते हैं. पहले के समय में बच्चे माता पिता और आस पड़ोस के लोगों के साथ ही रहा करते थे पर समय के बदलाव ने इस व्यवस्था को भी बदल दिया है. परिस्थितिवश आज बच्चे और माता पिता एक ही शहर में अलग-अलग रह रहे हैं. परिवार की व्यवस्था का विखंडन हो रहा है जिसके चलते सांस्कृतिक विरासत से जुड़ाव में भी कमी आ रही है.

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में सांस्कृतिक मूल्यों तथा खेलो के संरक्षण की व्यवस्था की गई है. गोयनका स्कूल में इन बातो पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

आज विदेशी लोग भारत की संस्कृति को अपना रहे हैं

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों में अच्छे संस्कारों का समावेश  के लिए जरूरी है कि उनके सामने उसी प्रकार का उदाहरण पेश किया जाए. जिस प्रकार पतंग के उडने के लिए डोर जरूरी है उसी प्रकार जीवन  में आगे बढने के लिए घर के बुजुर्गो का आर्शीवाद होना जरूरी है. बच्चे के पहले शिक्षक उसके माता पिता होते हैं और अगर घर का वातावरण अच्छा नहीं है तो फिर बच्चा भी अच्छा नहीं बन सकता है. आपकी संतान अच्छी  हो इसके लिए घर का वातावरण अच्छा होना चाहिए.

उन्होंने कहा कि आज विदेशी लोग भारत की संस्कृति को अपना रहे हैं और भारत के लोग विदेशी संस्कृति की ओर जा रहे हैं. आधुनिकता बुरी नहीं है पर अपनी संस्कृति और संस्कार से दूर होना गलत है. कार्यक्रम में प्रतिष्ठित व्यवसायी सर्वेश गोयल प्रधानाचार्य प्रेरणा, शशि लता आईएएस विक्रम सिंह और भारी संख्या में लोग एकत्रित थे.



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