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किसान भाई ध्यान दें..! पीएम मोदी की सरकार ने खोजा यूरिया संकट का हल, 4 महीने में लागू होंगे नियम; जानें किसे होगा नुकसान

New Urea Policy 2026: केंद्र सरकार ने युरिया संकट से निपटने का प्लान बना लिया है. मार्च 2026 से नई नियम लागू होने की संभावना है. इससे कई किसानों को लाभ होगा. हालांकि, कुछ लोगों को इसका खामयाजा उठाना पड़ सकता है.

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नयी यूरिया पॉलिसी

New Urea Policy 2026: हर साल एक खबर आम होती है कि युरिया की कालाबाजारी हो रही है. किसानों से युरिया के नाम पर लूट हो रही है. बिना युरियां के फसलें खराब हो रही है. हालांकि, अब ये आम खबरें पुरानी होने जा रही है. क्योंकि, केंद्र सरकार ने इस समस्या का हल निकालने के लिए बड़ा कदम उठाया है. मार्च 2026 यानी अगले 4 महीने में कुछ बड़े नियम बनने जा रहे हैं जिससे किसानों की युरिया की समस्या से निजात मिल जाएगी.

सरकार आने वाले महीनों में उर्वरक क्षेत्र में बड़े और ‘सटीक हस्तक्षेप’ (प्रिसाइज इंटर्वेंशंस) शुरू करने जा रही है. किसानों की ओर से यूरिया की कमी, डाइवर्जन और डीलरों द्वारा होर्डिंग की शिकायतों के बीच उर्वरक मंत्रालय ने संकेत दिया है कि मार्च 2026 तक कई नई नीतिगत पहलों को लागू किया जाएगा. उर्वरक सचिव रजत मिश्रा ने कहा कि-

‘अगले चार महीनों में उद्योग को विश्वसनीयता बढ़ाने और किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू किए जाएंगे’

क्या बदलाव होने वाले हैं? (Urea Policy)

सब्सिडी वाले उर्वरक की खरीद पर ‘लैंड लिंक्ड कैप’

गैस-आधारित यूरिया संयंत्रों के फिक्स्ड कॉस्ट में संशोधन

न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS) को यूरिया में लागू करना

सब्सिडी भुगतान में पारदर्शिता लाना

GST इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के रिफंड से संबंधित जटिलताओं को दूर करना

Urea Policy पर जिम्मेदारों के बयान

एक दिन पहले केंद्रीय उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने संसद में बताया कि केंद्र सरकार उर्वरक की मांग को किसानों की भूमि के आकार से जोड़ने के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगी. सरकार का मानना है कि सब्सिडी वाली यूरिया का बड़ा हिस्सा गैर-कृषि उपयोग में डायवर्ट हो रहा है, जिससे असली किसान प्रभावित हो रहे हैं. उर्वरक सचिव रजत मिश्रा ने यह भी संकेत दिया कि केंद्र सरकार 30 गैस-आवरित यूरिया संयंत्रों के फिक्स्ड कॉस्ट में बड़े संशोधन को अंतिम रूप दे रही है. यह लागत 25 वर्षों से संशोधित नहीं की गई है। अब सरकार इसे वर्ष के अंत तक बढ़ाने पर विचार कर रही है.

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इन बदलावों का क्या होगा प्रभाव?

इन बदलावों से उर्वरक क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी, सब्सिडी की लीक और डायवर्जन कम होगा, और किसानों और उद्योग दोनों को राहत मिलने की उम्मीद है. केंद्र सरकार इन्हें मार्च 2026 तक पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य रख रही है. खैर देखना होगा कि इससे किसाों पर क्या और कितना असर पड़ता है.



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