Bharat Express DD Free Dish

जस्टिस यशवंत की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय को जारी किया नोटिस, मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा को लेकर लोकसभा स्पीकर की ओर से गठित कमेटी को चुनौती देने वाली याचिका पर लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. 

Supreme Court
Edited by Vaibhav Gupta

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा को लेकर लोकसभा स्पीकर की ओर से गठित कमेटी को चुनौती देने वाली याचिका पर लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.  जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट 7 जनवरी को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.

लोकसभा स्पीकर द्वारा गठित कमेटी गलत

जस्टिस दीपांकर दत्ता ने टिप्पणी करते हुए कहा कि क्या कानून बनाने वालों को यह भी नही पता कि ऐसा नहीं किया जा सकता? दायर याचिका में जस्टिस वर्मा का कहना है कि जब 21 जुलाई को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में जस्टिस वर्मा को पद से हटाने का प्रस्ताव पेश किया गया था. तो ऐसी सूरत में जजेज इन्क्वारी एक्ट के तहत आगे जांच के लिए दोनों सदन की जॉइंट कमेटी का गठन होना चाहिए था. ऐसे में लोकसभा स्पीकर द्वारा गठित कमेटी गलत है. जस्टिस वर्मा को 10 जनवरी को कमेटी के सामने उपस्थित होने के लिए कहा गया था.

भ्रष्टाचार का जिक्र करते हुए लगाएआरोप

12 अगस्त को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने तीन सदस्यीय एक समिति का गठन किया था. समिति में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के एक-एक जज और एक वरिष्ठ वकील को शामिल किया गया है. सुप्रीम कोर्ट के जज अरविंद कुमार, मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस मणिन्द्र मोहन और कर्नाटक हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील बीवी आचार्य शामिल है.

लोकसभा में दिए गए महाभियोग प्रस्ताव नोटिस में जस्टिस वर्मा के आचरण और भ्रष्टाचार का जिक्र करते हुए गंभीर आरोप लगाए गए हैं और इसी आधार पर महाभियोग केसरी उनको हटाने की सिफारिश की गई है. 55 गवाहों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट और फायर ब्रिगेड स्टाफ के बयानों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों के पैनल ने जस्टिस वर्मा और उनके परिवार को प्रत्यक्ष रूप से कैश रखने का जिम्मेदार ठहराया. पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि आग के बाद रातों-रात कैश को हटाया गया और जानबूझकर सबूत नष्ट किए गए थे.

पत्र में उठाए गए आरोपों में पर्याप्त तथ्य

समिति ने बयान के अलावा वीडियो रिकॉर्डिंग भी किया, ताकि यह सुनिश्चित की जा सके कि इसे चुनौती न दी जा सके. समिति की 64 पेज की रिपोर्ट के अंत में दो पैराग्राफ हैं, जो यह निष्कर्ष निकालते हैं कि नकदी 30 तुगलक क्रिसेंट, नई दिल्ली के स्टोर रूम में पाई गई थी. ये आधिकारिक तौर पर जस्टिस वर्मा के कब्जे में था और यह स्टोर रूम तक पहुंच जस्टिस वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों के गुप्त या सक्रिय नियंत्रण में पाई गई थी.

समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा 22 मार्च के पत्र में उठाए गए आरोपों में पर्याप्त तथ्य है और यह सही पाया गया है कदाचार इतना गंभीर है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने की कार्यवाही शुरू करने की आवश्यकता है. 14 मार्च को दिल्ली में जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के बाहरी हिस्से में आग लगने की घटना के दौरान दमकल कर्मियों को बोरे में भरकर रखी गई जली हुई नकदी मिली थी.

ये भी पढ़ें: नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सोनिया व राहुल गांधी को राऊज एवेन्यु कोर्ट से राहत

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read