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‘मुंबई का बॉस अपुन ही होगा’, ठाकरे बंधुओं के ‘महामिलन’ क्या है 3 फायदे?

Maharashtra Politics: 20 साल की दुश्मनी खत्म करते हुए अब अब मुंबई पर राज करने के लिए दो भाई एक हो गए हैं. बालासाहेब की विरासत बचाने के लिए ठाकरे बंधुओं ने जो दांव चला है उसने विरोधियों की नींद उड़ा दी है. इससे 3 बड़े फायदे होने की संभावना है.

Maharashtra Politics Uddhav Thackeray Raj Thackeray Alliance for BMC Polls 2026

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में जिस पल का इंतजार पिछले 2 दशक से हो रहा था, आखिरकार वह घड़ी आ गई. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2026 से ठीक पहले, दो भाई उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पुरानी कड़वाहट भुलाकर एक हो गए हैं. बुधवार को शिवतीर्थ (शिवाजी पार्क) पर एक ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों ने शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के गठबंधन का औपचारिक ऐलान कर दिया.

गठबंधन का ऐलान करते हुए मंच पर केवल बाल ठाकरे की तस्वीर थी, न उद्धव की, न राज की. इससे साफ संदेश गया कि यह गठबंधन सिर्फ और सिर्फ बालासाहेब की विचारधारा को बचाने के लिए है. बाल ठाकरे की विरासत को बचाने के लिए यह ‘महामिलन’ शिवसैनिकों के लिए एक भावनात्मक क्षण भी है.

‘आज का दिन मंगलमय है’

उद्धव ठाकरे ने कहा कि हम साथ रहने के लिए साथ आए हैं. महाराष्ट्र का नेतृत्व ठाकरे परिवार का है और आगे भी ठाकरे ही करेंगे. राज ठाकरे ने भी हुंकार भरी और कहा कि महाराष्ट्र किसी भी झगड़े से बड़ा है. हम ऐलान करते हैं कि मुंबई का मेयर मराठी होगा और हमारा होगा. वहीं संजय राउत ने इस दिन को ‘मंगलमय’ बताते हुए कहा कि राज और उद्धव मराठी मानुष के लिए ‘मंगल कलश’ लेकर आए हैं.

29 साल की सत्ता बचाने की जंग

BMC पर पिछले 29 साल से शिवसेना का एकतरफा राज रहा है. लेकिन 2024 के विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार और पार्टी में हुई टूट के बाद उद्धव ठाकरे कमजोर पड़ गए थे. वहीं, राज ठाकरे की पार्टी मनसे भी अपना जनाधार खो चुकी थी. अब दोनों भाइयों के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई है. 15 जनवरी को होने वाले BMC चुनाव में 227 वार्डों पर कब्जा जमाना ही इनका एकमात्र लक्ष्य है.

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क्यों अहम है यह साथ?

  • उद्धव गुट के पास सिर्फ 20 विधायक बचे हैं और राज ठाकरे के पास शून्य. साथ आना मजबूरी भी है और जरूरत भी.
  • एशिया की सबसे अमीर नगरपालिका BMC का बजट 74,000 करोड़ से ज्यादा है, जो कई राज्यों से भी अधिक है.
  • मुंबई पर पकड़ बनाए रखने के लिए BMC जीतना जरूरी है.
  • दोनों भाइयों के साथ आने से ‘मराठी वोट बैंक’ के एकजुट होने की संभावना बढ़ गई है.

सीट बंटवारा और कांग्रेस का एंगल

फिलहाल सीट शेयरिंग को लेकर कोई फॉर्मूला सार्वजनिक नहीं किया गया है. संजय राउत ने कहा कि भाइयों में व्यापार नहीं होता, यह फैमिली है. हम देख लेंगे. हालांकि, उद्धव गुट ने इशारों में कांग्रेस और शरद पवार को भी साथ आने का न्योता दिया है ताकि बीजेपी के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा खड़ा किया जा सके.



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