Rebellion Against Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक साथ दो बड़े मोर्चों पर करारा झटका लगा है. दुनिया के सबसे ताकतवर राष्ट्रपति के हाथ उनकी ही संसद ने बांध दिए हैं. सीनेट ने युद्ध रोकने का फरमान सुनाया, तो ट्रंप का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. हालांकि, आज ही सुप्रीम कोर्ट एक ऐसा फैसला सुनाने वाला है जो ट्रंप के ‘टैरिफ प्लान’ को हमेशा के लिए खत्म कर सकता है. यह फैसला तय करेगा कि राष्ट्रपति अपनी मनमर्जी से राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर आर्थिक प्रतिबंध लगा सकते हैं या नहीं.
दो बड़े मोर्चों पर करारा झटका
सबसे बड़ी हार उन्हें सीनेट में झेलनी पड़ी, जहां वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए लाया गया ‘वॉर पावर्स रेज़ोल्यूशन’ पास हो गया. हैरानी की बात यह रही कि ट्रंप की अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के पांच सीनेटरों ने बगावत कर दी और डेमोक्रेट्स का साथ दिया. इस प्रस्ताव के पास होने से अब राष्ट्रपति ट्रंप कांग्रेस की मंजूरी के बिना वेनेजुएला या किसी अन्य देश पर एकतरफा सैन्य कार्रवाई नहीं कर पाएंगे.
दूसरी तरफ, ट्रंप की आर्थिक नीतियों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं. आज अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ‘ओपिनियन डे’ है, जहां 1977 के इमरजेंसी पावर कानून के तहत लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ की वैधता पर फैसला आना है. डोनाल्ड ट्रंप रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% टैरिफ लगाने की तैयारी में थे, लेकिन अब सबकी निगाहें अदालत पर टिकी हैं.
ट्रंप का अपनी पार्टी पर हमला (Donald Trump On Republican Rebels)
सीनेट में मिली हार के बाद राष्ट्रपति ट्रंप का गुस्सा फूट पड़ा. उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के उन सीनेटरों पर तीखा हमला बोला जिन्होंने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर वोट किया. उन्होंने दावा किया कि यह वोट अमेरिकी आत्मरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा में बहुत बड़ी बाधा डाल सकता है. उनका कहना है कि वेनेजुएला जैसे मुद्दों पर तुरंत कार्रवाई की जरूरत होती है, जिसे यह प्रस्ताव बाधित करेगा. उन्होंने कहा कि-
‘रिपब्लिकन को शर्म आनी चाहिए कि उन्होंने अमेरिका की रक्षा करने की मेरी शक्तियों को छीनने की कोशिश की.’
युद्ध की शक्तियों पर लगाम (Senate Limits Donald Trump Powers)
अमेरिकी सीनेट में वेनेजुएला के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को सीमित करने वाले प्रस्ताव के पक्ष में 52 और विरोध में 47 वोट पड़े. यह ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि रिपब्लिकन बहुमत वाली सीनेट में भी वे अपनी पार्टी को एकजुट नहीं रख सके. 5 रिपब्लिकन सदस्यों ने डेमोक्रेट्स के साथ वोटिंग की. इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रपति कांग्रेस (संसद) की मंजूरी के बिना किसी भी देश के खिलाफ युद्ध या सैन्य संघर्ष शुरू न कर सकें.
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डोनाल्ड ट्रंप का मुश्किल दौर
कुल मिलाकर, डोनाल्ड ट्रंप आज अपने कार्यकाल के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. एक तरफ विधायिका (सीनेट) ने उनकी युद्ध शक्तियों (War Powers) पर लगाम कस दी है, तो दूसरी तरफ न्यायपालिका (सुप्रीम कोर्ट) उनकी आर्थिक शक्तियों की समीक्षा कर रही है. अपनी ही पार्टी की बगावत ने यह साबित कर दिया है कि वेनेजुएला और टैरिफ जैसे मुद्दों पर ट्रंप की आक्रामक नीतियां अब घर में ही विरोध का सामना कर रही हैं.
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