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अरावली पहाड़ियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; कहा- ‘यह सिर्फ तकनीकी मामला नहीं, देश के पर्यावरण का भविष्य है’

अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट चार सप्ताह बाद सुनवाई करेगा. सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने साफ किया कि यह मामला केवल तकनीकी नहीं, बल्कि देश के पर्यावरणीय भविष्य से जुड़ा है.

Aravali Protection Supreme Court Order

अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट चार सप्ताह बाद सुनवाई करेगा. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मुद्दा सिर्फ तकनीकी नही बल्कि देश के पर्यावरण के भविष्य से जुड़ा हुआ है. सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह साफ किया है कि अरावली क्षेत्र में किसी तरह की अवैध खनन बर्दाश्त नही किया जाएगा. क्योंकि इसके परिणाम अपूर्णीय और दूरगामी होते है.

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी साफ कर दिया है कि इसको लेकर कोई नई याचिका दायर नहीं होनी चाहिए. कोर्ट ने एमिकस क्यूरी से रिपोर्ट देने को कहा है. मामले की सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के एम नटराजन ने कहा कि राज्य सरकार तत्काल यह सुनिश्चित करेगी कि राज्य में कोई अवैध खनन न हो. कोर्ट ने हाई पावर कमेटी से सदस्यों के नाम सुझाने को कहा है. कोर्ट ने कहा कि अरावली की वैज्ञानिक परिभाषा तय करने के लिए एक हाई पावर्ड कमेटी बनाए गा. कमेटी में पर्यावरण, वानिकी, भू-विज्ञान और संबंधित क्षेत्रो के स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल है.

पर्यावरणविदों का कहना है कि इस एकरूप मानदंड के कारण हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में फैली प्राचीन अरावली श्रृंखला के लगभग 90 फीसदी हिस्से को अरावली की श्रेणी से बाहर किया जा सकता है, जिससे वहां खनन गतिविधियों का रास्ता साफ हो जाएगा.

दो पहाड़ियों के बीच की भूमि भी अरावली रेंज में होगी शामिल

सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से की गई सिफारिशों को स्वीकार करते हुए कहा था कि दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक अरावली की रक्षा के लिए स्पष्ट और वैज्ञानिक परिभाषा बेहद जरूरी है. समिति ने यह भी सुझाव दिया था कि पहाड़ी के साथ उसकी सहायक ढलानें, आसपास की भूमि और संबंधित भू-आकृतियां, चाहे उनका ढाल कितना भी हो, अरावली का हिस्सा मानी जाएंगी.

इसी तरह दो पहाड़ियों के बीच का क्षेत्र भी निर्धारित मापदंडों के अनुसार अरावली रेंज में शामिल होगा. सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को दिए अपने फैसले में कहा था कि ऐसी कोई भी जमीन जिसकी ऊंचाई स्थानीय भू-भाग (जमीन) से 100 मीटर या उससे अधिक हो, यदि दो या उससे अधिक ऐसी पहाड़ियां 500 मीटर के दायरे में है, तो उन्हें एक ही पहाड़ियों का समूह माना जाएगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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