महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, कर्मठ सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्वदेशी के प्रबल पक्षधर, ‘पंजाब केसरी’ लाला लाजपत राय की जयंती पर देशभर में उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया गया. उनका अदम्य साहस, अखंड समर्पण, अटूट देशभक्ति और त्यागमयी जीवन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अमूल्य धरोहर है, जो आज भी हर भारतीय को राष्ट्रप्रथम की भावना से कार्य करने की प्रेरणा देता है. इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं और संगठनों ने उन्हें नमन किया.
अतुलनीय योगदान को किया याद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लाला लाजपत राय को याद करते हुए भावुक संदेश साझा किया. पीएम मोदी ने स्वतंत्रता संग्राम में उनके अतुलनीय योगदान को याद किया और उनके बलिदान को देश की अमिट विरासत बताया.
मातृभूमि की अमर संतान पंजाब केसरी लाला लाजपत राय को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए उन्होंने अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। उनका बलिदानी जीवन देश की हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा। pic.twitter.com/QGua6VZB1t
— Narendra Modi (@narendramodi) January 28, 2026
पीएम मोदी ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘मातृभूमि की अमर संतान पंजाब केसरी लाला लाजपत राय को उनकी जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि. मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए उन्होंने अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया.’
उन्होंने आखिर में ये भी बताया कि उनका बलिदानी जीवन देश की हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा.
जनआंदोलन को दी नई दिशा
लाला लाजपत राय भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के उन अग्रणी नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जनआंदोलन को नई दिशा दी. उनका जन्म 28 जनवरी 1865 को पंजाब के ढुडीके गांव में हुआ था. वे लाल-बाल-पाल की ऐतिहासिक त्रयी का हिस्सा थे, जिसने उग्र राष्ट्रवाद को जनमानस तक पहुंचाया.
शिक्षा क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान
लाला लाजपत राय न केवल एक क्रांतिकारी नेता थे, बल्कि एक विचारक, लेखक और समाज सुधारक भी थे. उन्होंने स्वदेशी आंदोलन को मजबूती दी और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार को जन आंदोलन का रूप दिया. शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा. उन्होंने लाहौर में डीएवी कॉलेज की स्थापना में अहम भूमिका निभाई.
1928 में साइमन कमीशन के विरोध के दौरान लाठीचार्ज में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद लाला लाजपत राय पीछे नहीं हटे. उन्होंने कहा था, “मेरे शरीर पर पड़ी हर लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत में आखिरी कील साबित होगी.” कुछ ही दिनों बाद वो शहीद हो गए, लेकिन उनका साहस स्वतंत्रता संग्राम की दिशा तय कर गया.
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-भारत एक्सप्रेस
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