उत्तराखंड हरिद्वार में आयोजित श्री विग्रह प्रतिमा स्थापना समारोह में देशभर से श्रद्धालु और आध्यात्मिक नेतृत्व की बड़ी मौजूदगी रही. यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सांस्कृतिक एकता और भारतीय सभ्यता के प्रति सम्मान का प्रतीक भी माना जा रहा है.
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने क्या कहा?
इस भव्य समारोह में भाग लेते हुए कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपने विचार साझा किए और कार्यक्रम की गरिमा तथा उसके संदेश पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन हमें हमारी सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक एकता की ओर पुनः प्रेरित करते हैं. आचार्य प्रमोद कृष्णम के अनुसार यह आयोजन सिर्फ एक प्रतिमा स्थापना नहीं, बल्कि समाज को मानवीय आदर्शों और नैतिक चेतना के प्रति जागरूक करने का अवसर है.
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने समारोह के दौरान यह भी रेखांकित किया कि ऐसे आयोजनों से आध्यात्मिक चेतना के प्रसार में वृद्धि होती है और देश भर के लोग अपने सांस्कृतिक मूल्यों से और अधिक जुड़ते हैं. उन्होंने सभी उपस्थित जनों से इस तरह के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने तथा समाज में शांति, एकता और सद्भाव बनाए रखने की अपील की.
विशेष समारोह का आयोजन
हरिद्वार की पवित्र भूमि पर यह प्रतिमा स्थापना समारोह धार्मिक स्थलों में से एक के रूप में देखा जा रहा है, जहां श्रद्धालु न केवल पूजा-अर्चना के लिए आते हैं, बल्कि अपने अंदर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव भी करते हैं. इसमें शामिल होने वाले संतों, विद्वानों और समाजसेवी व्यक्तित्वों ने भी आचार्य प्रमोद कृष्णम के विचारों का अनुमोदन किया और कहा कि ऐसे आयोजनों से सनातन परंपरा का संरक्षण और प्रचार संभव होता है.
इस विशेष समारोह का आयोजन पूज्य स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज के पावन सानिध्य में किया गया, जिसमें देश के अनेक प्रतिष्ठित संत, योगगुरु, आध्यात्मिक चिंतक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व शामिल हुए. आयोजन स्थल पर भक्ति, श्रद्धा और अध्यात्म का अद्भुत वातावरण देखने को मिला.
दिग्गज हस्तियों का जमावड़ा
विराट आयोजन में योगगुरु स्वामी रामदेव, स्वामी बालकानंद, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और कल्कि धाम के पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम सहित कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे. इसके अलावा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और सामाजिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया.
समारोह के आयोजन से जुड़ी तस्वीरों और कार्यक्रम की झलकियों से स्पष्ट हुआ कि यह आयोजन धार्मिक आस्था और संस्कृति के समन्वय का बहुत बड़ा अवसर रहा, जो आने वाले समय में और भी प्रेरणादायक कार्यक्रमों के मार्ग प्रशस्त करेगा.
-भारत एक्सप्रेस
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