दिल्ली/हिमांशु दुबे: सुंदर दिखने की चाहत हर महिला के मन में होती है, लेकिन इस चाहत को पूरा करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ब्यूटी प्रोडक्ट्स की सुरक्षा पर अक्सर सवाल खड़े होते हैं. बाजार में मिलने वाले विभिन्न प्रकार के सौंदर्य प्रसाधनों में मौजूद हानिकारक केमिकल्स आज एक बड़ी चिंता का विषय बन चुके हैं. यह रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती है कि कैसे ये उत्पाद हमारी त्वचा और स्वास्थ्य को अंदर से खोखला कर रहे हैं.
रसायनों का मायाजाल और विशेषज्ञों की चेतावनी
पंचशील हॉस्पिटल की डायरेक्टर डॉ. पूनम गोयल के अनुसार, आजकल महिलाएं चेहरे पर जिन आर्टिफिसियल प्रोडक्ट्स का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रही हैं, वे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक हैं.
उदाहरण के तौर पर, होंठों को रंगने वाली लिपस्टिक में कार्सिनोजेनिक एजेंट जैसे घातक पदार्थ पाए जाते हैं, जो न केवल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों को जन्म दे सकते हैं, बल्कि होंठों के फटने और उनके काले होने का मुख्य कारण भी बनते हैं. इसी तरह, फेस मेकअप में इस्तेमाल होने वाले कृत्रिम रंग त्वचा पर दाने, खुजली और पस जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर रहे हैं.
आंखों और चेहरे पर पड़ता बुरा असर
सौंदर्य प्रसाधनों का प्रभाव केवल त्वचा की ऊपरी सतह तक सीमित नहीं है. आंखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए उपयोग किए जाने वाले आईलाइनर और मस्कारा में ऐसे रसायन होते हैं जो आंखों की पलकों और आईब्रो के बालों के गिरने का कारण बनते हैं.
इसके अलावा, कई फेस प्रोडक्ट्स में पेट्रोलियम जेली, मरकरी (पारा) और एसिड की मात्रा पाई जाती है, जिससे चेहरे पर स्थायी दाग-धब्बे पड़ सकते हैं. विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इन रसायनों का असर इतना गहरा होता है कि यह महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान भी जटिलताएं पैदा कर सकता है.
मानक और नियंत्रण की आवश्यकता
इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अजय लेखी ने कड़े सुझाव दिए हैं. उनका कहना है कि उपभोक्ताओं को लोकल और सस्ते प्रोडक्ट्स के लालच से बचकर केवल स्टैंडर्ड और प्रमाणित उत्पादों का ही चुनाव करना चाहिए.
साथ ही, उन्होंने सरकार से मांग की है कि जिस प्रकार क्लीनिक चलाने के लिए लाइसेंस अनिवार्य है, उसी प्रकार ब्यूटी पार्लर और मेकअप केंद्रों का भी रजिस्ट्रेशन होना चाहिए. सरकार को इन उत्पादों की बिक्री और उनमें इस्तेमाल होने वाले पदार्थों पर कड़ा नियंत्रण रखना चाहिए ताकि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न हो सके.
ये भी पढ़ें- भौं-भौं करता युवक…गुजरात से आया हैरान कर देने वाला मामला, जानिए रेबीज को हल्के में लेना कैसे पड़ गया भारी?
जागरूकता ही बचाव है
आर्टिफिशल स्किन केयर प्रोडक्ट्स जिस तरह से महिलाओं के चेहरे और सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं, उसे देखते हुए अब समय आ गया है कि समाज और सरकार मिलकर कदम उठाएं. डॉक्टरों और महिलाओं की ओर से उठ रही यह मांग जायज है कि नकली उत्पादों पर रोक लगाने के लिए कड़े नियम और मानक तय किए जाएं.
महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे बाजारू उत्पादों के बजाय घर पर बने प्राकृतिक सौंदर्य प्रसाधनों को प्राथमिकता दें. अपनी सेहत और चेहरे की सुरक्षा के लिए सतर्क रहना और सही जानकारी रखना ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.




