Saudi Aramco attack oil price impact: ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध के बीच ईरान ने सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी ‘अरामको’ पर हमला कर दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने ‘फतह-ए-खैबर’ ऑपरेशन के तहत सऊदी के प्रमुख तेल ठिकानों को निशाना बनाया. बता दें कि जब बात दौलत, दबदबे और दुनिया को चलाने वाले ईंधन की आती है, तो एक ही नाम सबसे ऊपर आता है वो है सऊदी अरब की ऑइल कंपनी अरामको (Saudi Aramco). अब दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी पर हमला होने से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में हड़कंप मच गया है. विशेषज्ञों द्वारा कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर रिफाइनरी को नुकसान ज्यादा हुआ तो विश्व भर में तेल के लाले पड़ सकते हैं.
कितनी ताकतवर है Aramco ऑइल रिफाईनरी?
अरामको की कहानी साल 1933 में शुरू हुई थी, जब इसकी नींव अमेरिकी साझेदारी के साथ पड़ी थी. हालांकि, 1980 तक आते-आते सऊदी सरकार ने इसका पूरी तरह अधिग्रहण कर लिया. आज इसका मुख्यालय सऊदी अरब के धहरान में है और यहां 75,000 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं.
वहीं इसका मार्केट कैप लगभग 1.6-1.7 ट्रिलियन डॉलर के करीब है, जो इसे कई बार Apple और Microsoft जैसी दिग्गज टेक कंपनियों को पछाड़कर दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंपनी बनाता है.
उत्पादन में कौन से स्थान पर है Aramco?
अरामको की ताकत का असली राज इसके विशाल हाइड्रोकार्बन रिजर्व में छिपा है. यह कंपनी हर दिन औसतन 10-12 मिलियन बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करती है. साल 2024 में इसका राजस्व लगभग $480 बिलियन रहा. अरामको सिर्फ तेल निकालती ही नहीं, बल्कि तेल शोधन (Refining), पेट्रोकेमिकल्स, लुब्रिकेंट्स और रिटेल सेक्टर में भी इसका बड़ा साम्राज्य है. अब यह कंपनी भविष्य को देखते हुए नेचुरल गैस, LNG और रिन्यूएबल एनर्जी की ओर भी तेजी से कदम बढ़ा रही है.
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बाजार का बेताज बादशाह है अरामको
सऊदी अरब के स्टॉक एक्सचेंज (Tadawul) पर लिस्टेड अरामको का कुल मिलाकर 90 % से ज्यादा हिस्सा सरकार के पास है. इसकी एक खासियत यह भी है कि जब दुनिया में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूती हैं, तब यह कंपनी दुनिया में सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली संस्था बन जाती है. संक्षेप में कहें तो अरामको वो इंजन है जो न केवल सऊदी अरब की तकदीर बदल रहा है, बल्कि पूरी दुनिया के पहियों को रफ्तार दे रहा है.
क्या बढ़ जाएंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
ईरान के इस हमले से वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है. अरामको की रिफाइनरी पर हमला होने से कच्चे तेल के दामों में उछाल आ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह सिलसिला जारी रहा तो तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं. भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह बहुत बड़ा झटका होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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