सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के 51 निजी अस्पतालों को गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज और आरक्षित बेड उपलब्ध न कराने के लिए सख्त चेतावनी दी है. अदालत ने इन अस्पतालों को अवमानना नोटिस जारी किया है. जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने यह फैसला सुनाया.
अस्पतालों पर लगे गंभीर आरोप
इन अस्पतालों पर आरोप है कि उन्होंने गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों के लिए कम से कम 10 फीसदी इनपेशेंट (IPD) बेड और 25 फीसदी आउटपेशेंट (OPD) सेवाएं मुफ्त देने का नियम नहीं माना. ये अस्पताल रियायती दरों पर सरकारी जमीन लेकर बने हैं. इसलिए गरीबों को मुफ्त इलाज देना उनकी कानूनी जिम्मेदारी है.
कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और जमीन देने वाली एजेंसियों से नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा कि रियायती जमीन देने के बदले अस्पतालों को गरीब मरीजों के लिए तय संख्या में बेड और इलाज मुहैया कराना जरूरी है. लेकिन कई अस्पताल 2018 के पुराने आदेश का भी पालन नहीं कर रहे. दिल्ली सरकार के हलफनामे से कोर्ट को पता चला कि अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की.
किन अस्पतालों को नोटिस मिला
नोटिस वाले अस्पतालों में सर गंगा राम अस्पताल, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट, बीएलके मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, मूलचंद खैरातीराम अस्पताल, सेंटर फॉर साइट और राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर रोहिणी जैसे बड़े नाम शामिल हैं. कोर्ट ने इनसे पूछा है कि अवमानना कार्रवाई क्यों न हो और दिल्ली सरकार की दी गई छूट-रियायतें क्यों न वापस ली जाएं.
अगला कदम और नोडल अधिकारी
कोर्ट ने दिल्ली के स्वास्थ्य सचिव को इस मामले का नोडल अधिकारी बनाया है. उन्होंने कहा है कि अस्पतालों और अधिकारियों की जवाबदेही तय कर जरूरी कदम उठाएं. मामला अब आगे की सुनवाई के लिए लंबित है.
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