Israel Iran conflict: ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने पूरे मिडिल ईस्ट को हिला दिया है. पिछले एक हफ्ते में हालात इतने बिगड़े कि एयरस्पेस बंद हो गए, दूतावासों पर हमले हुए और कई देशों में सुरक्षा संकट गहरा गया. खाड़ी देशों से लेकर लेबनान तक इस संघर्ष का असर साफ दिखाई दे रहा है.
जंग की शुरुआत और बढ़ता तनाव
ईरान और इजरायल के बीच तनाव लंबे समय से था लेकिन हाल ही में मिसाइल और ड्रोन हमलों ने इसे खुले युद्ध का रूप दे दिया. इजरायल ने तेहरान और बेरूत पर हवाई हमले किए, वहीं ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजरायल और खाड़ी देशों को निशाना बनाया. सातवें दिन तक हालात इतने गंभीर हो गए कि कई देशों ने अपने नागरिकों को तुरंत बाहर निकलने की सलाह दी.
एयरस्पेस बंद और फ्लाइट्स पर असर
इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर हवाई यात्रा पर पड़ा. यूएई, सऊदी अरब, कतर, ओमान, बहरीन, कुवैत और ईरान ने अपने एयरस्पेस बंद कर दिए. एमिरेट्स, कतर एयरवेज और एतिहाद जैसी बड़ी एयरलाइंस ने अपनी फ्लाइट्स रद्द कर दीं. इससे टिकटों की कीमतें अचानक बढ़ गईं और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा.
खाड़ी देशों में हालात
जंग का असर खाड़ी देशों पर भी साफ दिख रहा है. दुबई एयरपोर्ट और तटीय होटलों को नुकसान पहुंचा है. फुजैरा इंडस्ट्रियल ज़ोन में धमाका हुआ, जिससे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही रुक गई है, जिससे वैश्विक व्यापार पर असर पड़ा है.
दूतावासों पर हमले और निकासी
ईरान के ड्रोन हमलों में सऊदी अरब स्थित अमेरिकी दूतावास को नुकसान पहुंचा. अमेरिका ने छह देशों से अपने गैर-जरूरी कर्मचारियों और उनके परिवारों को निकालने का आदेश दिया. कई यूरोपीय देशों ने भी अपने नागरिकों को तुरंत बाहर निकलने की सलाह दी.
लेबनान और पड़ोसी देशों पर असर
लेबनान में इजरायली हमलों में 217 लोगों की मौत हुई. ईरान में अब तक 1,230 से ज्यादा लोग मारे गए. कुवैत, बहरीन और ओमान में भी मिसाइल हमलों से नुकसान हुआ.
वैश्विक असर
तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. एशिया और यूरोप तक की फ्लाइट्स प्रभावित हुई हैं क्योंकि लंबी दूरी की उड़ानों को मिडिल ईस्ट से होकर गुजरना पड़ता है. क्रूज शिप्स को भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति नहीं मिल रही.
आर्थिक दबाव और ऊर्जा संकट
तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ गई हैं. भारत जैसे देशों ने वैकल्पिक आयात मार्ग तलाशने शुरू कर दिए हैं. यूरोप में भी ऊर्जा संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है.
मानवीय संकट
लेबनान और ईरान में हजारों लोग विस्थापित हो गए हैं. अस्पतालों में घायल लोगों की भीड़ है और दवाइयों की कमी हो रही है. संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो मानवीय संकट और गहरा सकता है.
ये भी पढ़ें-ट्रंप सरकार का नया रेजीम चेंज मॉडल: सीमित हमले और राजनीतिक दबाव से सत्ता परिवर्तन
ईरान-इजरायल युद्ध ने पूरे मिडिल ईस्ट को अस्थिर कर दिया है. एयरस्पेस बंद होने से यात्रा और व्यापार प्रभावित हुआ है, दूतावासों पर हमले से सुरक्षा संकट गहरा गया है और तेल-गैस सप्लाई पर असर से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है. आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं अगर संघर्ष को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.
