Russia Enters US Israel Iran War: ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच जारी विनाशकारी युद्ध ने तब नया मोड़ ले लिया जब रूस ने खुलकर अपने पुराने दोस्त ईरान का हाथ थाम लिया. वॉशिंगटन पोस्ट की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, रूस अब केवल शब्दों से नहीं बल्कि ‘खुफिया इनपुट्स’ के जरिए ईरान की मदद कर रहा है. रूसी सैटेलाइट्स अब अमेरिकी युद्धपोतों, विमानों और सैन्य ठिकानों की सटीक लोकेशन ईरान को मुहैया करा रहे हैं, जिससे अमेरिकी सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.
पुतिन का वो फोन कॉल (Israel Iran War News)
जंग शुरू होने के एक हफ्ते बाद, क्रेमलिन की ओर से पहली बार सीधे तौर पर ईरान से संपर्क साधा गया है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को फोन कर न केवल अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर गहरा दुख जताया, बल्कि रणनीतिक सहयोग पर भी चर्चा की. पुतिन ने सार्वजनिक रूप से इलाके में दुश्मनी खत्म करने और ‘डिप्लोमेटिक’ तरीके से मुद्दे सुलझाने पर जोर दिया है, लेकिन पर्दे के पीछे रूस की सक्रियता कुछ और ही कहानी बयां कर रही है.
रूस बना ईरान की ‘आंख और कान’ (Israel Iran War Breaking)
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की मिसाइलों की असली ताकत उसकी तकनीक नहीं, बल्कि रूस की अत्याधुनिक सैटेलाइट इमेजरी है. कुवैत में हाल ही में हुए ड्रोन हमले में 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत के पीछे रूसी इंटेलिजेंस का हाथ माना जा रहा है. ईरान के पास इतनी क्षमता नहीं थी कि वह अमेरिकी सैनिकों के अस्थायी ठिकानों को ट्रैक कर सके, लेकिन रूसी तकनीक ने यह काम आसान कर दिया.
गिव एंड टेक का खेल
रूस और ईरान के बीच यह रिश्ता ‘लेने-देने’ पर टिका है. ईरान, रूस को यूक्रेन युद्ध के लिए शाहेद ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दे रहा है, जिसके बदले में पुतिन अब ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और मिलिट्री ऑपरेशन्स को सुरक्षा कवच प्रदान कर रहे हैं. रूस की इस सक्रियता पर अमेरिका ने ऊपर से ‘बेपरवाह’ दिखने की कोशिश की है. अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा है कि रूस के मिलिट्री एसेट्स की जानकारी देने से ईरान में उनके मिलिट्री ऑपरेशन्स पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. अमेरिका ने अपना मकसद दोहराते हुए कहा है कि उनका लक्ष्य ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को पूरी तरह खत्म करना है.
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चीन सतर्क और आर्थिक मददगार
जहां रूस खुफिया जानकारी दे रहा है, वहीं चीन ने ‘आर्थिक ढाल’ तैयार कर ली है. चीन, ईरान के तेल पर बहुत निर्भर है. वह चाहता है कि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ सुरक्षित रहे ताकि उसकी एनर्जी सप्लाई बाधित न हो. कई रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन ईरान को मिसाइल कंपोनेंट्स और स्पेयर पार्ट्स देने की तैयारी में है, हालांकि वह रूस की तरह सीधे जंग में कूदने से बच रहा है.
2026 का नया ‘वर्ल्ड ऑर्डर’ (Israel Iran War Update)
मिडिल ईस्ट की यह जंग अब दो देशों की लड़ाई नहीं रही. एक तरफ अमेरिका और इजरायल हैं, तो दूसरी तरफ रूस और ईरान का गठबंधन. पुतिन की एंट्री ने यह साफ कर दिया है कि रूस अपने दोस्तों को अकेला नहीं छोड़ता. अब देखना यह है कि क्या पुतिन का यह फोन कॉल और रूसी सैटेलाइट्स इस ‘महायुद्ध’ का रुख अमेरिका के खिलाफ मोड़ने में सफल होंगे?
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