India oil tanker Shenlong Strait of Hormuz diplomacy: मिडिल ईस्ट में मचे भीषण कोहराम और बारूद की गंध के बीच भारत के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर आई है. जब पूरी दुनिया की नजरें ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) पर टिकी हैं, जहां टैंकरों को निशाना बनाया जा रहा है, वहां भारत ने अपनी कूटनीति का ऐसा जादू चलाया कि मौत के रास्ते से गुजरकर हमारा तेल टैंकर सुरक्षित मुंबई बंदरगाह पहुंच गया है. यह सिर्फ एक टैंकर की वापसी नहीं है, बल्कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर की उस ‘सधी हुई कूटनीति’ की जीत है, जिसने युद्ध के मैदान में भी भारत के लिए रास्ता बनवा लिया. बताते चलें कि मंगलवार यानी कि 10 मार्च को विदेशमंत्री एस जयशंकर ने ईरान के अपने समकक्ष अब्बास अराघची से बात की थी, जिसके बाद ही ये संभव हो सका है.
भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत
ये खबर इसलिए खास है क्योंकि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद भारत की ओर आने वाला यह पहला जहाज है जिसने मौत के मुहाने से निकलकर अपनी मंजिल तय की है. ईरान ने साफ कर दिया था कि वह अमेरिका और इजरायल से जुड़े किसी भी जहाज को यहां से गुजरने नहीं देगा. इस तनाव के बीच भारत की ओर आने वाला यह पहला जहाज है, जिसने इस ‘किलर जोन’ को सफलतापूर्वक पार किया और मुंबई पहुंचा.
जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री से क्या डील की?
इस नामुमकिन मिशन को मुमकिन बनाया विदेश मंत्री एस. जयशंकर की सूझबूझ ने. दरअसल मंगलवार (10 मार्च) को जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर लंबी बात की थी. जब ईरान ने ये तक कह दिया था कि वह चीन के अलावा किसी और के जहाजों को रास्ता नहीं देगा, तब जयशंकर ने मोर्चा संभाला.
सूत्रों की मानें तो जयशंकर ने ईरान के साथ भारत की पुरानी दोस्ती और रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) का हवाला दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के ऊर्जा हितों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए. इस बातचीत का असर यह हुआ कि ईरान ने भारतीय हितों को सुरक्षा देने का भरोसा दिया और ‘शेनलोंग’ सुरक्षित निकल आया.
मुंबई कब पहुंचा ये तेल टैंकर?
1,35,335 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर शेनलोंग तो मुंबई सुरक्षित पहुंच गया है, लेकिन खबर यह भी है कि संकट अभी टला नहीं है. शिपिंग महानिदेशालय के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय ध्वज वाले 28 जहाज अभी भी उस युद्ध क्षेत्र के आसपास फंसे हुए हैं. हालांकि, भारत सरकार और विदेश मंत्रालय हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठे हैं.
अपनी सक्रिय कूटनीति के दम पर भारत अब तक देश महिमा, स्वर्ण कमल और विशवा प्रेरणा जैसे 7 जहाजों को अरब सागर के सुरक्षित इलाके में लाने में कामयाब रहा है. जयशंकर लगातार जर्मनी और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रियों के भी संपर्क में हैं, ताकि वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर भारत की पकड़ ढीली न पड़े.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.




