Aghori Ashram Khachrod: उज्जैन जिले की खाचरोद तहसील की मुखिया गली स्थित कालिका शक्तिपीठ अघोरी आश्रम में चैत्र नवरात्रि की नवमी पर श्रद्धा और आध्यात्म का अनूठा संगम देखने को मिला. यहां अघोरी परंपरा के अनुसार देर रात मां कालिका की विशेष पूजा-अर्चना बड़े ही विधि-विधान और प्राचीन पद्धति से संपन्न हुई.
नकारात्मक ऊर्जा के लिए विशेष अनुष्ठान
महंत ओंकार दास उदासीन अघोरी, कालिका शक्तिपीठ ने बताया कि नवमी की रात्रि को होने वाली यह विशेष महापूजा मुख्य रूप से लोक कल्याण और क्षेत्र से नकारात्मक ऊर्जा के नाश के लिए की जाती है. इस दिव्य आयोजन में माँ का आशीर्वाद लेने के लिए देर रात तक श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ा रहा. भक्तों में इस पूजा को लेकर गहरी आस्था देखी गई.
यह आश्रम अपनी विशिष्ट परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है, जो महान अघोरी संत कनीराम की 13वीं पीढ़ी से लगातार चली आ रही है. वर्तमान महंत ओंकार दास उदासीन, जो महामंडलेश्वर के पद पर भी आसीन हैं, इस विरासत को पूरी निष्ठा के साथ जीवंत बनाए हुए हैं.
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नाथ और उदासीन संप्रदाय का दुर्लभ संगम
आश्रम की सबसे बड़ी विशेषता यहां नाथ संप्रदाय और उदासीन संप्रदाय की परंपराओं का एक दुर्लभ मिलन है, जो इस स्थान के आध्यात्मिक महत्व को और भी बढ़ा देता है. अघोरी परंपरा से जुड़ी यह साधना और पूजा पद्धति न केवल भक्तों के कष्टों को हरने वाली मानी जाती है, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा के संचार का एक प्रमुख माध्यम भी है.
इस आश्रम की ख्याति केवल खाचरोद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा नाता खरगोन जिले के ओंकारेश्वर स्थित शक्तिपीठ से भी है. चैत्र नवरात्रि की नवमी पर यहाँ का माहौल पूरी तरह अलौकिक हो जाता है, जहां भक्त आस्था और शक्ति उपासना के संगम के साक्षी बनते हैं.
मानवता की रक्षा का संकल्प
महंत के अनुसार, पीढ़ियों से चली आ रही इस पूजा का मुख्य उद्देश्य मानवता की रक्षा और धर्म की पुनर्स्थापना है. यदि आप भी आध्यात्म और प्राचीन अघोरी परंपरा का वास्तविक स्वरूप देखना चाहते हैं, तो खाचरोद का यह कालिका शक्तिपीठ एक प्रमुख श्रद्धा केंद्र के रूप में स्थापित है.
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-भारत एक्सप्रेस
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