Urdu Conclave 2026

करोड़ों की लड़ाई में सिक्कों की खनक! जानिए कौन है केरल की वो कैंडिडेट जिसके पास है महज ₹44 का बैंक बैलेंस

केरल की एट्टुमानूर सीट से 26 वर्षीय आशना थंपी सिर्फ 84 रुपये की संपत्ति के साथ चुनाव मैदान में उतरी हैं. बिना बड़े फंड और संसाधनों के, वे आम लोगों के मुद्दों पर जोर देते हुए क्राउडफंडिंग और डोर-टू-डोर कैंपेन के जरिए चुनाव लड़ रही हैं.

Edited by Sahil Singh

केरल की एट्टुमानूर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रही 26 साल की एक लड़की आजकल पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है. चर्चा उनके किसी विवादित बयान की नहीं, बल्कि उनके बैंक बैलेंस की है. सोशल मीडिया पर आजकल एक ‘चुनावी हलफनामा’ (Affidavit) तेजी से वायरल हो रहा है.

यह हलफनामा है आशना थंपी का, जो सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) की उम्मीदवार हैं. जब चुनाव आयोग के पास उन्होंने अपनी संपत्ति का ब्योरा दिया, तो अधिकारी भी हैरान रह गए. आशना ने बताया कि उनके पास नकद मात्र 40 रुपये हैं और उनके बैंक खाते में कुल 44 रुपये जमा हैं. यानी उनकी कुल जमा पूंजी सिर्फ 84 रुपये है. उनके पास न तो कोई अपनी जमीन है, न घर और न ही कोई जेवर है.

आज के दौर में जहां उम्मीदवार करोड़ों की संपत्ति दिखाते हैं, वहां आशना केरल चुनाव 2026 की सबसे गरीब प्रत्याशी बनकर उभरी हैं.

कौन हैं आशना थंपी?

आशना सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि संघर्ष की एक मिसाल हैं. 26 साल की यह युवा नेता काफी शिक्षित हैं; उन्होंने साहित्य में ग्रेजुएशन किया है और पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा भी हासिल किया है. वह कोई शौकिया नेता नहीं, बल्कि जमीन से जुड़ी एक ‘फुल टाइम’ एक्टिविस्ट हैं.

आशना को केरल में लोग उनके निडर अंदाज के लिए जानते हैं. आशा (ASHA) कार्यकर्ताओं के हक की लड़ाई लड़ते हुए उन्होंने विरोध स्वरूप अपना सिर तक मुंडवा लिया था. चाहे के-रेल (K-Rail) परियोजना का विरोध हो या आम लोगों के हक की बात, आशना हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़ी नजर आती हैं. उनके माता-पिता भी दिहाड़ी मजदूर हैं और लंबे समय से पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं. उनके लिए राजनीति कोई बिजनेस नहीं, बल्कि समाज की सेवा का एक जरिया है.

चंदे के चंद रुपयों से चल रहा है प्रचार

आशना का चुनाव प्रचार किसी बड़ी पार्टी के ‘शो-ऑफ’ जैसा कतई नहीं है. उनके पास न तो लग्जरी गाड़ियों का काफिला है और न ही बड़े-बड़े होर्डिंग्स. उनके दोस्त और समर्थक अपनी जेब से 10, 20 या 50 रुपये का चंदा इकट्ठा करके उनके पर्चे छपवा रहे हैं. वह खुद धूप में घर-घर जाकर लोगों से मिल रही हैं और स्थानीय मुद्दों जैसे कोट्टायम मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की कमी, किसानों की बदहाली और पीने के पानी की किल्लत पर बात कर रही हैं.

क्या हौसले से जीता जा सकता है चुनाव?

आशना का मुकाबला उन दिग्गजों से है जिनके पास अथाह पैसा और संसाधनों की कोई कमी नहीं है. लेकिन आशना का मानना है कि लोकतंत्र में नोटों की गड़गड़ाहट से ज्यादा जनता के मुद्दों की गूंज मायने रखती है. एट्टुमानूर की जनता 6 अप्रैल को वोट डालेगी. उन्होंने आम आदमी को यह उम्मीद दी है कि बिना करोड़ों रुपये के भी व्यवस्था को चुनौती दी जा सकती है.

ये भी पढ़ें: ‘मेक इन इंडिया’ का कमाल! मोदी सरकार में डिफेंस एक्सपोर्ट में 62% की बड़ी बढ़ोतरी, निर्यात में दिखा रिकॉर्ड उछाल

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read