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अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाला मामले में कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल जेम्स को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले के कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने भारत-यूएई प्रत्यर्पण संधि को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है.

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Edited by Vaibhav Gupta

दिल्ली हाई कोर्ट से अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाला मामले में कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल जेम्स को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका लगा है. कोर्ट ने भारत यूएई प्रत्यर्पण संधि 1999 के अनुच्छेद 17 को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है.

याचिका में दम नहीं: कोर्ट

जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविन्द्र दुडेजा की पीठ ने निचली अदालत के उस आदेश को भी बरकरार रखा, जिसमें मिशेल की ये दलील खारिज की गई थी कि वो अधिकतम सजा (7 साल) काट चुका है. इसलिए उसे रिहा किया जाए. कोर्ट ने साफ कहा कि याचिका में कोई दम नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है.

मामले की सुनवाई के दौरान मिशेल की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया था कि जिन आरोपों के आधार पर उन्हें भारत लाया गया था, उनमें अधिकतम सजा की अवधि को वह पहले ही काट चुके है. इसलिए उन्हें रिहा किया जाए. वहीं, सीबीआई, ईडी और केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने रिहाई की मांग का विरोध करते हुए याचिका को खारिज करने की मांग की थी.

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने 4 मार्च को मिशेल को पांच लाख रुपए के निजी मुचलका और इतनी ही जमानत राशि पर जमानत मिल चुकी है.

मिशेल को मिल गई थी जमानत

कोर्ट ने मिशेल को विशेष अदालत में अपना पासपोर्ट जमा कराने का निर्देश दिया था. मिशेल को सीबीआई मामले में 18 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी. मिशेल की ओर से पेश वकील अल्जो जोसेफ ने कहा था कि कुल मिलाकर ये 6 साल और 5 महीने की सजा है.

मिशेल का कहना है कि संशोधन जेल नियमों के मुताबिक, मैं अच्छे आचरण के आधार पर छूट का पात्र हूं. मान लें कि मुझे दोषी ठहराया गया है, तो मुझे एक-एक महीने की छूट मिलेगी. यानी 6 साल की सजा के लिए 6 महीने. सुप्रीम कोर्ट ने मिशेल को ये कहते हुए जमानत दे दिया था कि 25 वर्षों में मुकदमा पूरा नहीं हो सकता है.

क्या है पूरा मामला?

मिशेल को 4 दिसंबर 2018 को गिरफ्तार किया गया था, जबकि प्राथमिकी 2013 में दर्ज की गई थी. इस मामले में कुल 60 आरोपी शामिल है. जिनमें से 21 ने न तो जांच में शामिल हुए है और न ही उन्हें आज तक ईडी द्वारा समन जारी किया गया है.

अभियोजन पक्ष की पहली शिकायत 24 नवंबर 2014 को दायर की गई थी. जबकि 21 नवंबर 2024 को 12 वी सप्लिमेंट्री चार्जशीट दाखिल किया गया है. उसे दिसंबर 2018 में दुबई से प्रत्यर्पित किया गया था और बाद में उसे सीबीआई तथा ईडी ने गिरफ्तार कर लिया था.

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-भारत एकस्प्रेस



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