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दशकों का इंतजार खत्म: 21वीं सदी के सबसे बड़े फैसले के लिए पीएम मोदी ने मांगा आशीर्वाद

पीएम मोदी ने ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में घोषणा की कि 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र महिला आरक्षण की प्रतीक्षा को समाप्त करेगा. जानें 21वीं सदी के इस सबसे बड़े फैसले की मुख्य बातें.

Nari Shakti Vandan Conference PM Modi Said History of Indian Parliament

पीएम मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ को संबोधित किया. उन्होंने महिलाओं के सशक्तीकरण को 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक बताते हुए कहा कि देश एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है.

ऐतिहासिक संकल्प और भविष्य के लक्ष्य

संबोधन की शुरुआत में पीएम मोदी ने बैसाखी और नववर्ष की शुभकामनाएं दीं. साथ ही जलियांवाला बाग के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा, “भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में से एक लेने जा रहा है. यह निर्णय पूरी तरह से नारी शक्ति वंदन को समर्पित है, जो हमारे भविष्य के लक्ष्यों को पूरा करेगा.”

दशकों की प्रतीक्षा का होगा अंत

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि 16, 17 और 18 अप्रैल का समय महिला आरक्षण की दशकों पुरानी प्रतीक्षा के अंत के रूप में देखा जाएगा. उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में नई संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के रूप में जो पहला कदम उठाया गया था, अब उसे निर्णायक मोड़ पर ले जाने का समय आ गया है.

16 अप्रैल से विशेष सत्र का आयोजन

लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करने के लिए 16 अप्रैल से संसद के बजट सत्र की विशेष बैठक आयोजित की जा रही है. पीएम मोदी ने कहा कि वह यहाँ उपदेश देने नहीं, बल्कि देशभर की महिलाओं का आशीर्वाद लेने आए हैं, क्योंकि उनका समर्थन ही इस ऐतिहासिक पहल की असली ताकत है.

चार दशक का संघर्ष और सर्वसम्मति

पीएम मोदी ने उल्लेख किया कि महिला आरक्षण की जरूरत पिछले चार दशकों से महसूस की जा रही थी. उन्होंने कहा कि 2023 में जब यह कानून लाया गया, तो सभी दलों ने सर्वसम्मति से इसका समर्थन किया था. विपक्ष की भी यही मांग थी कि यह प्रावधान 2029 तक हर हाल में लागू होना चाहिए.

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मजबूत लोकतंत्र और सामाजिक न्याय

प्रधानमंत्री ने देश की महिलाओं को ‘नए युग के आगमन’ की बधाई दी. उन्होंने विश्वास जताया कि यह निर्णय भारत की निर्णय प्रक्रिया में सामाजिक न्याय को एक स्वाभाविक हिस्सा बनाएगा और हमारे लोकतंत्र को और अधिक समावेशी और शक्तिशाली बनाएगा.

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