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इंटरनेशनल मीडिया कॉन्फ्रेंस में भारत एक्सप्रेस के ग्रुप मैनेजिंग एडिटर राधेश्याम राय बोले-पत्रकारिता प्रोफेशन नहीं, पैशन है

Radheshyam Rai DME Event: दिल्ली मेट्रोपॉलिटन एजुकेशन (DME) के मीडिया स्कूल के नेल्सन मंडेला ऑडिटोरियम में आयोजित इंटरनेशनल मीडिया कॉन्फ्रेंस में भारत एक्सप्रेस के ग्रुप मैनेजिंग एडिटर राधेश्याम राय ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की.

Radheshyam Rai DME Event

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Radheshyam Rai DME Event: दिल्ली मेट्रोपॉलिटन एजुकेशन (DME) के मीडिया स्कूल के नेल्सन मंडेला ऑडिटोरियम में आयोजित इंटरनेशनल मीडिया कॉन्फ्रेंस में भारत एक्सप्रेस के ग्रुप मैनेजिंग एडिटर राधेश्याम राय ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की. इस दौरान उन्होंने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, चुनौतियों और अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए छात्रों को महत्वपूर्ण संदेश दिया.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राधेश्याम राय ने कहा कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक जुनून है एक पैशन है, जिसमें हर दिन नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने छात्रों को आगाह करते हुए कहा कि खासकर एआई के दौर में अर्थ का अनर्थ होने की संभावना और बढ़ गई है, इसलिए पत्रकारों को अपनी समझ, अध्ययन और तथ्यों की जांच पर भरोसा रखना चाहिए.

अनुभवों के जरिए समझाया पत्रकारिता का सच

राय ने अपने छात्र जीवन का एक किस्सा साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1988 में इलाहाबाद में अमिताभ बच्चन की चुनावी सभा के दौरान अचानक कार्यक्रम में बदलाव हो गया, जिससे लोगों में निराशा फैल गई. इस उदाहरण के जरिए उन्होंने बताया कि पत्रकारिता में ऐसे अप्रत्याशित हालात आम हैं और पत्रकार को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए.

उन्होंने एक और दिलचस्प उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे एक हिंदी खबर के गलत अनुवाद ने उसका अर्थ पूरी तरह बदल दिया. ‘परचूनिया’ शब्द का अंग्रेजी में ‘लाइम वाटर बेचने वाला’ और फिर ‘लेमन वाटर बेचने वाला’ बन जाना यह दर्शाता है कि भाषा की अगर समझ ना हो तो खबर का स्वरूप भी बदल जाता है.

डाउट करिए, तभी सच तक पहुंचेंगे

छात्रों को सलाह देते हुए भारत एक्सप्रेस के ग्रुप मैनेजिंग एडिटर राधेश्याम राय ने कहा कि एक अच्छे पत्रकार की पहली जिम्मेदारी है- हर तथ्य पर संदेह करना. उन्होंने दार्शनिक रेने डेकार्ट के सिद्धांत ‘I doubt, therefore I think, therefore I am’ का हवाला देते हुए कहा कि सवाल करने और खोज करने से ही सच्चाई सामने आती है.

संघर्ष और सीख से बनता है पत्रकार

अपने करियर की शुरुआत के दिनों को याद करते हुए राय ने बताया कि कैसे उन्होंने मुंबई में संघर्ष करते हुए काम सीखा. उन्होंने कहा कि क्लासरूम में मिली शिक्षा सिर्फ एक आधार देती है, असली सीख फील्ड में काम करने से मिलती है.


उन्होंने छात्रों से कहा कि पत्रकारिता में सफलता की कोई सीमा नहीं होती, लेकिन असफलता भी उतनी ही कठोर होती है. ऐसे में निरंतर सीखना, मेहनत करना और खुद पर भरोसा रखना बेहद जरूरी है.

संस्थान को दी शुभकामनाएं

कार्यक्रम के अंत में राधेश्याम राय ने दिल्ली मेट्रोपॉलिटन एजुकेशन के मीडिया स्कूल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन छात्रों को समृद्ध बनाते हैं. उन्होंने छात्रों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे संस्थान का नाम रोशन करें.

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इस इंटरनेशनल मीडिया कॉन्फ्रेंस में छात्रों और शिक्षकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया और पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई.

-भारत एक्सप्रेस



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