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आंखों की रोशनी नहीं, फिर भी RAS परीक्षा में गाड़ा झंडा: रात में भजन गाकर निकाला पढ़ाई का खर्च, अब अफसर बनेंगे उदयपुर के भावेश देसाई

हौसलों की उड़ान! उदयपुर के भावेश देसाई ने साबित कर दिया कि शारीरिक बाधाएं सपनों को नहीं रोक सकतीं. आर्थिक तंगी के बीच रात में भजन गाकर खर्च जुटाने वाले भावेश ने RAS परीक्षा में दिव्यांग श्रेणी में पूरे राजस्थान में दूसरा स्थान प्राप्त किया है.

Bhavesh Desai, RAS topper, Rajasthan
Edited by Radha Priya

RAS Success Story: उदयपुर से एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसे पढ़कर शायद आपकी आंखों में आंसू आ जाएं, लेकिन अगले ही पल आपका सिर गर्व से ऊंचा हो जाएगा. यह कहानी है भावेश देसाई की, जिन्होंने दुनिया को यह दिखा दिया कि मंजिल पाने के लिए आंखों की रोशनी से ज्यादा ‘मन की आंखों’ और मजबूत इरादों की जरूरत होती है.

RAS परीक्षा 2024 के नतीजे आए, तो भावेश का नाम कामयाबी की लिस्ट में चमक रहा था. बचपन से ही दृष्टिबाधित (आंखों से न देख पाने वाले) होने के बावजूद भावेश ने वह मुकाम हासिल किया है, जो अच्छे-भले संसाधनों वाले युवाओं के लिए भी एक सपना होता है.

भजनों की थाप और किताबों का साथ

भावेश की कामयाबी का सफर इतना आसान नहीं था. उनके पास न तो मखमली बिस्तर थे और न ही महंगी कोचिंग की सुविधाएं. आर्थिक तंगी ऐसी थी कि अपना खर्च निकालना भी दूभर था. लेकिन भावेश ने हार नहीं मानी. उन्होंने एक अनोखा रास्ता चुना दिन भर वह प्रशासनिक सेवा (RAS) की तैयारी में पसीना बहाते और रात को अपनी सुरीली आवाज में भजन गाकर पैसे कमाते थे. इन्हीं पैसों से उन्होंने अपनी पढ़ाई का खर्च उठाया और अपनी जिद को जिंदा रखा.

नतीजों ने सबको चौंकाया

भावेश की इस कड़ी मेहनत का फल जब मिला, तो हर कोई दंग रह गया. उन्होंने टीएसपी (TSP) क्षेत्र के सामान्य वर्ग में 97वीं रैंक हासिल की है. वहीं, अगर दिव्यांग श्रेणी की बात करें तो भावेश ने पूरे राजस्थान में दूसरा स्थान (2nd Rank) प्राप्त किया है. एक शिक्षक के रूप में काम कर रहे भावेश का अब प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना हकीकत में बदलने जा रहा है.

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हार मान लेने वालों के लिए बड़ा सबक

आज के दौर में जहां छोटे-छोटे तनाव और असफलताओं से युवा टूट जाते हैं, वहां भावेश देसाई एक मिसाल बनकर उभरे हैं. उन्होंने साबित कर दिया कि परिस्थितियां कैसी भी हों, अगर इंसान के भीतर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो किस्मत को भी झुकना पड़ता है. भावेश का कहना है कि वह प्रशासन में जाकर समाज के उन तबकों की मदद करना चाहते हैं जो संसाधनों के अभाव में पीछे रह जाते हैं. उदयपुर का यह ‘लाल’ आज पूरे राजस्थान के लिए प्रेरणा का स्रोत है. उनकी यह जीत सिर्फ एक परीक्षा की जीत नहीं है, बल्कि उस हौसले की जीत है जो कभी हारना नहीं जानता.

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-भारत एक्सप्रेस



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