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बड़ा उदासीन अखाड़ा के बैंक खातों को क्यों किया जा रहा है सीज?

Bada Udaseen Akhara Prayagraj: प्रयागराज के बड़ा उदासीन अखाड़ा में संतों के बीच चल रहे संपत्ति विवाद के बाद देशभर के बैंक खाते सीज कर दिए गए हैं. सहायक रजिस्ट्रार ने नए ऑडिटर की नियुक्ति की है.

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Bada Udaseen Akhara Prayagraj: अनम फातिमा/प्रयागराज: प्रयागराज स्थित देश के चर्चित बड़ा उदासीन अखाड़ा के देशभर में संचालित सभी बैंक खातों को सीज करने का आदेश जारी किया गया है. यह कार्रवाई अखाड़े के पदाधिकारियों और साधु-संतों के बीच चल रहे संपत्ति विवाद के बाद की गई है. कार्यालय सहायक रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसाइटी चिट्स एंड फंड्स प्रयागराज के सहायक रजिस्ट्रार मनोज कुमार ने 23 अप्रैल को यह आदेश जारी किया, जिससे अखाड़े के पदाधिकारियों में हड़कंप मच गया है.

आवश्यक खर्चों के लिए लेनी होगी अनुमति (Bada Udaseen Akhara Prayagraj)

जारी आदेश के अनुसार, अखाड़े के बैंक खातों से लेनदेन पर पूर्ण रोक रहेगी. हालांकि, अनिवार्य आवश्यकताओं जैसे कर्मचारियों का वेतन, बिजली का बिल और पानी का बिल जमा करने के लिए संबंधित अधिकारी से पूर्व स्वीकृति लेनी होगी. इसके साथ ही, अखाड़े की किसी भी संपत्ति को लीज पर देने या उसकी बिक्री करने पर ऑडिट पूरा होने तक रोक लगा दी गई है. यह पाबंदी फिलहाल दो माह के लिए लगाई गई है.

संपत्ति विवाद और गुटबाजी का आरोप (Bada Udaseen Akhara Bank Accounts Frozen)

अखाड़े में लंबे समय से दो गुटों के बीच विवाद चल रहा है. यह मामला तब गरमाया जब सचिव अग्रदास और महंत रघुमुनि ने रजिस्ट्रार ऑफिस में शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने आरोप लगाया कि देशभर में अखाड़े की संपत्तियों में दुर्गादास गुट द्वारा हेराफेरी और ‘कागजी खेल’ किया जा रहा है. इसी शिकायत पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय इलाहाबाद के 20 अगस्त 2025 के फैसले के अनुपालन में यह सख्त कदम उठाया गया है.

नया ऑडिटर नियुक्त और रिसीवर की चर्चा

प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए सहायक रजिस्ट्रार ने ऑडिटर विवेक तिवारी को हटाकर संदीप कुमार को अखाड़े की सभी संपत्तियों की जांच के लिए नया ऑडिटर नियुक्त किया है. अखाड़े के भीतर चल रही इस खींचतान के कारण अब रिसीवर नियुक्त किए जाने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं. अगर संतों के बीच का यह विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो अखाड़े की व्यवस्था पूरी तरह रिसीवर के हाथों में जा सकती है.

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पदाधिकारियों की प्रतिक्रिया (Bada Udaseen Akhara Property Dispute)

अखाड़े के कोषाध्यक्ष शिवानंद गिरि और महंत दुर्गादास ने बताया कि फिलहाल उन्हें आदेश की आधिकारिक प्रति नहीं मिली है, लेकिन जांच की जानकारी मिली है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने तक बैंक खातों के इस्तेमाल पर रोक है और किसी भी तरह की नई खरीद या प्रॉपर्टी की लीज पर पाबंदी रहेगी. अखाड़े के महंत का कहना है कि वे शर्तों के साथ जरूरी कार्यों के लिए राशि निकाल सकते हैं, लेकिन किसी भी बड़ी वित्तीय गतिविधि पर रोक रहेगी.



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