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सुप्रीम कोर्ट की बड़ी व्याख्या: जबरन तेजाब पिलाना भी ‘एसिड अटैक’, अब आंतरिक चोट वाले पीड़ितों को भी मिलेगी सरकारी मदद

Acid Attack Victim: सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक पीड़ितों के अधिकारों को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और मानवीय फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल बाहरी चोटों के आधार पर ही पीड़ित का निर्धारण करना गलत है; आंतरिक रूप से एसिड से प्रभावित व्यक्ति भी उसी सुरक्षा और सहायता का हकदार है.

Supreme Court order
Edited by Shubhra Rai

Supreme Court Case: सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक की परिभाषा को व्यापक बनाते हुए आदेश दिया है कि जबरन एसिड पिलाने से आंतरिक चोट के शिकार लोगों को भी ‘दिव्यांग’ माना जाएगा. कोर्ट ने माना कि बाहरी चोट न होने के बावजूद ऐसे पीड़ितों को लंबे इलाज और पुनर्वास की जरूरत होती है. अब ऐसे पीड़ितों को 2016 के अधिनियम के तहत सभी सरकारी लाभ और कानूनी सुरक्षा प्राप्त होगी.

समान सुरक्षा और अधिकार मिलना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने जबरन एसिड पिलाये जाने में मामले में एक अहम फैसला दिया है. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ बाहरी चोट के आधार पर किसी को पीड़ित मानना गलत है. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जिन लोगों को जबरन एसिड पिलाया गया और जिनके शरीर पर बाहरी चोट नहीं दिखती उन्हें भी कानून के तहत समान सुरक्षा और अधिकार मिलना चाहिए.

एसिड अटैक पीड़ित माना जाएगा

कोर्ट ने यह भी कहा कि अपराध साबित करने का बोझ आरोपी पर डाला जाना चाहिए. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने निर्देश दिया कि जिन व्यक्तियों को जबरन एसिड पिलाया जाता है या आंतरिक चोटे आती हैं, भले ही कोई बाहरी विकृति न हो, उन्हें भी विकलांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम 2016 के तहत एसिड अटैक पीड़ित माना जाएगा.

ईलाज, पुनर्वास और आर्थिक सहायता की जरूरत

यह स्पष्टीकरण 2016 अधिनियम के लागू होने के समय से ही शामिल माना जाएगा. कोर्ट ने संबंधित मंत्रालय से इस मानित संशोधन को औपचारिक रूप से अधिसूचित करने की सराहना की है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि जबरन एसिड पिलाने के मामलों में शरीर के अंदर गंभीर नुकसान होता है.

ऐसे पीड़ितों को लंबे समय तक ईलाज, पुनर्वास और आर्थिक सहायता की जरूरत होती है, लेकिन कानूनी परिभाषा के संकीर्ण दायरे के कारण उन्हें दिव्यांग की श्रेणी में शामिल नहीं किया जाता.

कृत्रिम नली के जरिए फूड दिया जाता

पीड़िता की मांग है कि जिस तरह से एसिड अटैक पीड़ितो को दिव्यांगता का दर्जा दिया जाता है. उसी तर्ज पर एसिड पीने के लिए मजबूर करने वाली पीड़िताओं को भी दिव्यांगता का दर्जा मिलना चाहिए. उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि जबरन एसिड पीने के लिए मजबूर महिलाएं चल नहीं सकती है, कृत्रिम नली के जरिए फूड दिया जाता है.

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हमें इसे एक विकलांगता के रूप में देखना चाहिए. उन्होंने कहा कि आरोपियों के साथ भी ऐसी ही निर्दयता से पेश आना चाहिए. इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि बिल्कुल ऐसे आरोपियों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए.

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-भारत एक्सप्रेस 



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