prateek yadav death suspence: मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव के निधन को लेकर सस्पेंस कम होने का नाम नहीं ले रहा है. दरअसल मामले में अब उनके जिम पार्टनर स्वप्नेश पांडेय ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने मौत की कहानी को पूरी तरह बदल दिया है. स्वप्नेश के मुताबिक, प्रतीक की मौत की वजह (Gym partner on prateek yadav death) सिर्फ बीमारी नहीं बल्कि देर रात बेडरूम में गिरना और सिर पर लगी गंभीर चोट हो सकती है. इस खुलासे के बाद अब हर किसी की नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी है, जो इस ‘रहस्यमयी’ मौत की असल वजह साफ करेगी.
रात 12 बजे का वो ‘अस्पताल दौरा'(prateek yadav death suspence)
जिम पार्टनर स्वप्नेश पांडेय ने आईएएनएस (IANS) को बाइट देते हुए बताया कि प्रतीक यादव की तबीयत रात 11-12 बजे के करीब खराब हुई थी. वे लखनऊ के सिविल अस्पताल भी गए थे, लेकिन प्राथमिक जांच या इलाज के बाद वापस घर लौट आए. सवाल यह उठता है कि अगर स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्हें आधी रात को अस्पताल जाना पड़ा, तो उन्हें भर्ती क्यों नहीं किया गया या वे खुद वापस क्यों चले आए?
बेडरूम में गिरे और सिर पर लगी चोट?(Gym partner on prateek yadav death)
प्रतीक के जिम पार्टनर स्वप्नेश का दावा है कि घर पहुंचने के बाद प्रतीक की हालत और बिगड़ गई. उन्होंने बताया कि मुझे यह सुनने में आया कि वे अपने बेडरूम में गिर गए थे, जिससे उनके सिर में चोट लग गई.” पैर फिसलने से गिरने की इस थ्योरी ने मामले को और उलझा दिया है. क्या सिर की यही चोट जानलेवा साबित हुई? प्रतीक जैसे बॉडीबिल्डर और फिट व्यक्ति का अचानक पैर फिसलना और गिरना भी लोगों के गले नहीं उतर रहा है.
‘लंबे समय से चल रहा था इलाज’
एक तरफ प्रतीक को ‘फिटनेस आइकन’ माना जाता था, वहीं उनके साले मुकेश सिंह और जिम पार्टनर दोनों ने यह बात स्वीकार की है कि वे ‘थोड़े बीमार’ थे और उनका लंबे समय से इलाज चल रहा था. यह कौन सी बीमारी थी जिसे परिवार ने अब तक छुपा कर रखा था? क्या यह वही ‘तनाव’ था जिसका जिक्र अखिलेश यादव ने किया था, या कोई शारीरिक व्याधि जिसने धीरे-धीरे उन्हें कमजोर कर दिया था?
अपर्णा की गैर-मौजूदगी से बढ़ा सस्पेंस
हैरानी की बात यह भी रही कि जब यह पूरी घटना हुई, प्रतीक की पत्नी और बीजेपी नेता अपर्णा यादव लखनऊ में नहीं थीं. उनके भाई मुकेश सिंह को भी सोशल मीडिया के जरिए इस अनहोनी की खबर मिली. घर में मौजूद लोग उन्हें दोबारा अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. सुबह 4 से 5 बजे के बीच उनके निधन की पुष्टि हुई. अब पोस्टमार्टम हाउस के बाहर जुटी भीड़ और समाजवादी पार्टी के नेताओं की मांग ने इस ‘हादसे’ को जांच के घेरे में खड़ा कर दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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