यूनाइटेड किंगडम (UK) की राजनीति में इन दिनों कुछ बड़ा पक रहा है. हाल ही में स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के प्रथम मंत्रियों ने एक ऐतिहासिक संयुक्त समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इस कदम ने साफ कर दिया है कि इन तीनों क्षेत्रों के मन में अब यूके से पूरी तरह आजाद होने और अपना भविष्य खुद तय करने की इच्छा जोर पकड़ रही है.
यह पूरा मामला तब सामने आया जब वेल्स की राजधानी कार्डिफ में एक खास शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस बैठक में वेल्स के रन अप इरवर्थ, स्कॉटलैंड के जॉन स्विनी, उत्तरी आयरलैंड की मिशेल ओ’नील के अलावा आयरलैंड गणराज्य की विपक्षी नेता मैरी लू मैकडोनाल्ड ने भी हिस्सा लिया. इन सभी नेताओं ने मिलकर ‘कार्डिफ एग्रीमेंट’ पर मुहर लगाई और यह संदेश दिया कि अब इन द्वीपों का सियासी नक्शा और मिजाज तेजी से बदल रहा है.
क्या कहता है यह नया समझौता?
समझौते के दौरान नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि हर राष्ट्र को आत्मनिर्णय यानी खुद से फैसले लेने का पूरा अधिकार है. उनका कहना है कि लंदन की वेस्टमिंस्टर सरकार लोकतंत्र का गला नहीं घोट सकती और न ही इस हक को छीन सकती है कि जनता अपनी मर्जी से अपना मुस्तकबिल चुने.
यह समझौता ऐसे समय में आया है जब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसे वैश्विक नेताओं के बयानों ने इस मुद्दे को और गरमा दिया है. ट्रंप का यह कहना कि वह आयरलैंड के पुनर्मिलन का समर्थन करेंगे, इस पूरी बहस में एक नया मोड़ ले आया है.
सदियों पुराना इतिहास और आज का सच
अगर थोड़ा पीछे मुड़कर देखें, तो ब्रिटिश द्वीप समूह का इतिहास उठापटक से भरा रहा है. 1707 के यूनियन एक्ट के जरिए इंग्लैंड और स्कॉटलैंड को मिलाकर ग्रेट ब्रिटेन बनाया गया था. बाद में वेल्स और आयरलैंड भी इसमें जुड़ते चले गए. समय के पहिए के साथ आयरलैंड का एक बड़ा हिस्सा 1922 में अलग हो गया और केवल उत्तरी आयरलैंड यूके के साथ बना रहा.
लेकिन आज स्थिति यह है कि इन तीनों क्षेत्रों की राजनीतिक पार्टियां जैसे स्कॉटलैंड की एसएनपी या सिन फेन लगातार अपनी जनता के बीच स्वतंत्रता की अलख जगा रही हैं. हालांकि, कानूनी पेंच यह है कि यूके के सुप्रीम कोर्ट के नियमों के मुताबिक, किसी भी हिस्से में जनमत संग्रह कराने का अंतिम अधिकार केवल ब्रिटिश संसद के पास ही है, और वहां की मुख्य पार्टियां इस तरह के किसी भी अलगाव के खिलाफ हैं.
आगे क्या होगा?
भले ही कागजों पर अभी भी जनमत संग्रह कराना इतना आसान ना हो, लेकिन जनता की सोच में बदलाव साफ दिखने लगा है. हालिया सर्वे बताते हैं कि स्कॉटलैंड में लगभग 47 प्रतिशत लोग, उत्तरी आयरलैंड में 36 प्रतिशत और वेल्स में 32 प्रतिशत जनता स्वतंत्रता के पक्ष में खड़ी है.
यह भी पढ़ें- रोजगार मेले में पीएम मोदी 51 हजार से अधिक युवाओं में बांटेंगे नियुक्ति पत्र
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



