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RBI के लॉकर से लेकर मंदिरों में चढ़ावे और गृहणियों की तिजोरी तक, भारत के पास कुल इतना सोना है? देखें दुनिया के टॉप देशों की लिस्ट

Gold Price & Reserves Countrywise: रुपये कमजोर होते-होते भारत में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. जानें आज का नया भाव और समझें कि भारतीय महिलाओं के पास है कैसे दुनिया का सबसे बड़ा स्‍वर्ण खजाना मौजूद है.

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Vijay Ram Edited by Vijay Ram

भारतीय संस्कृति में सोना सिर्फ एक आभूषण नहीं, बल्कि सुख-दुख का सबसे भरोसेमंद साथी माना जाता है. अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जारी भारी अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव (जैसे पश्चिम एशिया में जारी संकट) के बीच घरेलू सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. आज यानी 21 मई 2026 को देश के प्रमुख शहरों में 24 कैरेट (शुद्ध सोना) और 22 कैरेट (ज्वेलरी गोल्ड) के भाव में हल्की स्थिरता देखी गई है.

रिकॉर्ड ऊंचाई को छूने के बाद आज दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग ₹74,200 से ₹74,500 प्रति 10 ग्राम के दायरे में बनी हुई है. वहीं, देश के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय कस्टमाइज्ड वैट (VAT) और मेकिंग चार्ज के कारण कीमतों में मामूली अंतर देखा जा सकता है.

कहां हैं खदानें और कैसे शुरू हुआ सफर?

भारत और सोने का रिश्ता हजारों साल पुराना है. बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत में व्यवस्थित रूप से सोना निकालने का इतिहास ऐतिहासिक रूप से सदियों पुराना है. देश में सोने की सबसे प्रसिद्ध खदान ‘कोलार गोल्ड फील्ड्स’ (KGF) है, जो कर्नाटक में स्थित है. ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, चोल राजवंश के समय से ही कोलार से पारंपरिक तरीकों से सोना निकाला जाता था, लेकिन साल 1880 में ब्रिटिश इंजीनियरों ने यहां आधुनिक मशीनों से खुदाई शुरू की थी. हालांकि, लागत बढ़ने और सोने के भंडार कम होने के कारण साल 2001 में केजीएफ (KGF) को पूरी तरह बंद कर दिया गया.

वर्तमान समय की बात करें तो भारत में कर्नाटक की ‘हट्टी गोल्ड माइंस’ (Hutti Gold Mines) देश की इकलौती ऐसी चालू खदान है, जहां से व्यावसायिक रूप से भारी मात्रा में सोना निकाला जाता है. इसके अलावा झारखंड के लावा खदान और आंध्र प्रदेश के रामगिरी क्षेत्र में भी सोने के छोटे भंडार मौजूद हैं.

सरकार की तिजोरी में कितना है सोना?

वैश्विक स्तर पर जब भी आर्थिक मंदी या युद्ध के बादल छाते हैं, तो दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपनी मुद्रा (Currency) को मजबूती देने के लिए बड़े पैमाने पर सोना जमा करते हैं. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी पिछले कुछ सालों से लगातार अपने ‘गोल्ड रिजर्व’ को बढ़ा रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास कुल 880.52 मीट्रिक टन सरकारी सोना मौजूद है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कुल कीमत $115 बिलियन (लगभग 9.5 लाख करोड़ रुपये) से भी अधिक है. हैरान करने वाली और गर्व की बात यह है कि आरबीआई ने हाल ही में ब्रिटेन के बैंक ऑफ इंग्लैंड की तिजोरियों से अपना करीब 168 टन सोना वापस भारत मंगा लिया है. अब भारत का 77% से अधिक सरकारी सोना देश की अपनी घरेलू तिजोरियों (मुंबई और नागपुर के वाल्ट्स) में पूरी तरह सुरक्षित रखा हुआ है.

अगर आपको लगता है कि रिजर्व बैंक के पास मौजूद 880 टन सोना बहुत ज्यादा है, तो भारतीय घरों और मंदिरों का आंकड़ा आपको चौंका देगा. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) और विभिन्न आर्थिक शोधों के अनुमान के मुताबिक, भारत के आम घरों (विशेषकर गृहणियों के पास) और देश के बड़े मंदिरों के पास कुल मिलाकर लगभग 25,000 से 27,000 टन सोना मौजूद है.

  • गृहणियों की शक्ति: दुनिया भर के कुल सोने का लगभग 11% हिस्सा अकेले भारतीय महिलाओं के पास आभूषणों के रूप में है. यह मात्रा अमेरिका, जर्मनी और चीन जैसे बड़े देशों के कुल सरकारी गोल्ड रिजर्व को मिलाकर भी बहुत ज्यादा बैठती है.
  • मंदिरों का वैभव: केरल का श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, आंध्र प्रदेश का तिरुपति तिरुमाला देवस्थानम और मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर जैसे अमीर धार्मिक स्थलों के पास हजारों टन सोना ट्रस्ट के रूप में सुरक्षित है, जो देश की सांस्कृतिक और आर्थिक संपन्नता को दर्शाता है.
  • गोल्‍ड इन वर्ल्‍ड: दुनिया में सबसे ज्यादा गोल्ड रिजर्व वाले देश

वैश्विक महाशक्तियों के बीच अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए सोना सबसे बड़ा हथियार है. आइए नजर डालते हैं कि वैश्विक स्तर पर सरकारी तिजोरियों में सबसे ज्यादा सोना रखने वाले टॉप देशों में भारत कहां खड़ा है.

रैंक देश का नाम गोल्ड रिजर्व (टन में)

US (अमेरिका)- 8,133.46 टन
इटली- 2,451.84 टन
चीन- 2,313.46 टन
भारत- 880.52 टन
जापान- 845.97 टन

इस सूची से साफ है कि भारत (RBI) ने अपनी मजबूत नीतियों के दम पर जापान को पछाड़ते हुए वैश्विक स्तर पर चौथे स्थान पर अपनी जगह पक्की कर ली है. यही बड़ी वजह है कि सोने की मांग और इसकी कीमतें भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालती हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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