नूह (मेवात), 23 मई: आज मेवात क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक अवसर रहा, जब राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक आयोग (NCMEI) के सदस्य एवं कार्यकारी अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) शाहिद अख्त़र ने अलिफ फाल्कन इंटरनेशनल स्कूल, नूह में आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम में शिरकत की। ‘अल्पसंख्यक युवाओं का राष्ट्र निर्माण में सशक्तिकरण: शिक्षा, नवाचार और नशा मुक्त समाज’ विषय पर आधारित इस सत्र ने पूरे मेवात में शिक्षा और युवा सशक्तिकरण की नई उम्मीदें जगाईं।
मुख्य अतिथि प्रो. शाहिद अख्त़र ने दिया शिक्षा की ताक़त पर ज़ोर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. शाहिद अख्त़र, जो केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक आयोग के पदाधिकारी हैं, ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा ही वह हथियार है जो किसी भी समाज को तरक़्क़ी और ख़ुशहाली के रास्ते पर ले जा सकती है। उन्होंने कहा, “मेवात में अपार संभावनाएं हैं। यह हसन मेवाती साहब की धरती है, तबलीग़ी जमात की शुरुआत यहीं से हुई। यहां के युवाओं में दम है, स्पार्क है।”
प्रो. अख्त़र ने युवाओं से अपील की कि वे इस क्षेत्र में अधिक से अधिक शैक्षणिक संस्थान स्थापित करें, जहां दीनी तालीम के साथ-साथ दुनियावी और आधुनिक शिक्षा भी दी जाए। उन्होंने सर सैयद अहमद ख़ान और ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे रोल मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा, “एक सामान्य व्यक्ति से मिसाइल मैन और राष्ट्रपति बनने तक का सफ़र शिक्षा के दम पर तय किया जा सकता है।”
डीएम कार्यालय में समीक्षा बैठक: अधिकारियों को दिए सख्त़ निर्देश
प्रो. शाहिद अख्त़र ने बताया कि इस दौरे का उद्देश्य केवल भाषण देना नहीं था, बल्कि ज़मीनी हक़ीक़त को समझना और समाधान के लिए ठोस क़दम उठाना है। उन्होंने कहा कि दोपहर 12:30 बजे डीएम कार्यालय में छह धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों (मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी, जैन) के शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें शिक्षकों की नियुक्ति, राष्ट्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन और बच्चों को मिल रही शिक्षा की गुणवत्ता की समीक्षा की गई।
इससे पहले सर्किट हाउस में करीब 50 युवाओं के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका निभाने का टास्क दिया। उन्होंने कहा, “युवा ही इस देश की ताकत हैं, और मैंने उनसे कहा कि वे मेवात में ऐसे शैक्षणिक इदारे खोलें, जैसे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की नींव रखी गई थी।”
शिक्षा की कमियों पर सीधी टिप्पणी – रिक्त पदों को भरने का आश्वासन
प्रो. अख्त़र ने मेवात की शिक्षा की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि यह क्षेत्र शैक्षिक रूप से पिछड़ा हुआ है। उन्होंने ज़िला शिक्षा अधिकारी (DEO) के साथ बैठक का ज़िक्र करते हुए बताया कि पांच DEO के पद पूरी तरह रिक्त हैं। उन्होंने कहा, “मैं डीएम साहब से बात करूंगा और ज़रूरत पड़ी तो मुख्य सचिव को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करूंगा कि मेवात जैसे शैक्षिक रूप से पिछड़े जिले में अधिकारियों की कमी न हो।”
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि हर माह या 15 दिन में एक घंटा डीएम साहब विशेष रूप से अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की समस्याओं को सुनें। उन्होंने कहा, “मैं जहां भी जाता हूं, यह व्यवस्था करता हूं ताकि प्रशासन और संस्थानों के बीच तालमेल बना रहे।”
विशिष्ट अतिथियों ने भी रखे विचार – सभी ने दिया युवा सशक्तिकरण का संदेश
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि श्री अखिल पिलानी, उपायुक्त, नूह मेवात ने कहा कि जिला प्रशासन हर संभव सहयोग के लिए तत्पर है। उन्होंने अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की समस्याओं के समाधान हेतु एक सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की बात कही।
डॉ. नवनीत गुलेरिया, अध्यक्ष, भारतीय हिमालयन रिसर्च सेंटर (विशेष अतिथि) ने कहा कि शिक्षा के साथ नवाचार और नशा मुक्त समाज का संकल्प ही मेवात को आगे ले जाएगा। उन्होंने भारतीय हिमालयन रिसर्च सेंटर की ओर से इस क्षेत्र में शैक्षिक अनुसंधान और युवा कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का आश्वासन दिया।
डॉ. नसीब अली चौधरी, सहायक प्राध्यापक, भारतीय भाषा केंद्र, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली (विशेष अतिथि) ने मातृभाषा में शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए कहा कि भाषा की बाधाएं दूर होंगी तभी अल्पसंख्यक समुदाय मुख्यधारा से जुड़ पाएंगे। उन्होंने युवाओं से अपनी भाषाई विरासत को संजोने के साथ ही आधुनिक ज्ञान को अपनाने का आह्वान किया।
आयोजन और सहयोग – अलिफ़ फ़ाल्कन इंटरनेशनल स्कूल की पहल
यह कार्यक्रम अलिफ़ फ़ाल्कन इंटरनेशनल स्कूल, नूह द्वारा भारतीय हिमालयन रिसर्च सेंटर के सहयोग एवं समर्थन से सर्किट हाउस सभागार, नूह के साथ ही फ़ाल्कन इंटरनेशनल स्कूल, मेवात, हरियाणा में सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षाविद, अधिकारी, विद्यार्थी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
प्रो. शाहिद अख्त़र का युवाओं से सीधा संवाद – ‘तालीम ही ताक़त है’
संवाद सत्र के दौरान जब प्रो. अख्त़र से पूछा गया कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और बुनियादी ढांचे की कमियों को कैसे दूर किया जाएगा, तो उन्होंने स्पष्ट कहा, “मैं अभी डीएम से बात करूंगा और मिनट्स लेकर चीफ सेक्रेटरी को पत्र लिखूंगा। मैं काम पर विश्वास रखता हूं।”
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे नवागत अधिकारियों से मिलें, अपनी समस्याएं रखें और जवाबदेही तय करें। “जब हम अपने हक़ की बात करेंगे, तभी बदलाव आएगा।”
उन्होंने पैग़ंबर मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की शिक्षाओं, क़ुरान के संदेश और सर सैयद, अब्दुल कलाम जैसे रोल मॉडल का ज़िक्र करते हुए कहा कि युवा इनसे प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकते हैं।
उम्मीद और सकारात्मक बदलाव का भरोसा
प्रो. शाहिद अख्त़र ने कहा, “मैं सकारात्मक सोच का इंसान हूं। ऊपर वाले ने मुझे इस मुक़ाम पर पहुंचाया है तो मैं कुछ करके दिखाऊंगा।” उन्होंने आश्वासन दिया कि वे डीएम से नियमित समीक्षा, रिक्त पदों को भरने, और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
—- भारत एक्सप्रेस
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