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क्या चुनाव आयोग पर कसने जा रहा है कानूनी शिकंजा? जानिए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किन 3 अर्जियों से मचा बवाल

सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की नियुक्ति, कानूनी सुरक्षा और अंदरूनी फैसलों को लेकर 3 अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं. राहुल गांधी समेत 11 विपक्षी नेताओं ने भी सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी है.

Supreme Court Hearing On Election Commission Appointment Protection Rahul Gandhi Petition

देश की सबसे बड़ी अदालत में भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ एक साथ तीन अलग-अलग मोर्चों पर कानूनी जंग छिड़ गई है. सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों आयुक्तों के खिलाफ एक साथ कई याचिकाएं दाखिल हुई हैं. इन याचिकाओं के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या आयोग के कामकाज और अधिकारों पर शिकंजा कसने की तैयारी है. इस राजनीतिक और कानूनी घमासान के बीच चुनाव आयोग ने भी पिछले एक महीने में अपने पांच बड़े फैसलों को बदला है.

कानूनी सुरक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती

पहला मोर्चा गैर-सरकारी संस्था ‘एडीआर’ (ADR) ने खोला है. संस्था ने चुनाव आयुक्तों को 2023 के कानून के तहत मिली आजीवन कानूनी सुरक्षा को चुनौती दी है. याचिका में कहा गया है कि किसी भी अधिकारी को किसी भी तरह की जवाबदेही से मुक्त सुरक्षा देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है. कोर्ट ने भी हाल में टिप्पणी की थी कि ऐसी सुरक्षा तो जजों को भी नहीं मिलती.

वहीं दूसरा मोर्चा ‘लोक प्रहरी’ नाम की संस्था ने खोला है. इस याचिका में 2023 के चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया वाले कानून को चुनौती दी गई है, जिस पर 5 जजों की संविधान पीठ सुनवाई करेगी. मांग की गई है कि अनूप बरनवाल केस में दिए सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश को लागू किया जाए, जिसमें नियुक्ति समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को भी शामिल करने की बात कही गई थी.

विपक्ष की याचिका और अंदरूनी विवाद

तीसरा मोर्चा विपक्षी दलों ने खोला है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत 11 विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर आयोग के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया में गड़बड़ियों का आरोप लगाया है. यह याचिका एक मीडिया रिपोर्ट के बाद सामने आई, जिसमें दावा किया गया था कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्तों ने आयोग के कई फैसलों पर दर्जनों बार आपत्तियां जताई थीं.

विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी को इसमें पक्षकार बनाया है. यदि अदालत में प्रक्रियात्मक चूक साबित होती है, तो चुनाव आयोग के शीर्ष नेतृत्व पर नैतिक दबाव काफी बढ़ सकता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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