केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित ‘जनजाति संस्कृति समागम’ में शामिल हुए. यह कार्यक्रम भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित किया गया था. इसमें देशभर से बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग पहुंचे.
अमित शाह ने कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि जनजातीय समाज ने दुनिया को सबसे टिकाऊ और संतुलित जीवनशैली दी है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज हमेशा प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर जीवन जीता है और यही उनकी सबसे बड़ी पहचान है. उन्होंने यह भी कहा कि प्रकृति पूजा की परंपरा भारतीय संस्कृति और सनातन विचार से जुड़ी हुई है.
धर्म परिवर्तन पर कही बड़ी बात
गृह मंत्री ने कहा कि संविधान हर व्यक्ति को अपने धर्म के अनुसार जीने का अधिकार देता है. उन्होंने साफ कहा कि किसी भी व्यक्ति का लालच या दबाव डालकर धर्म परिवर्तन कराना गलत है. उन्होंने लोगों से अपनी संस्कृति और परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का आह्वान किया.
राम और शबरी का उदाहरण
अपने संबोधन में अमित शाह ने भगवान राम और शबरी की कथा का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि भगवान राम ने शबरी के बेर खाकर समाज को समानता का संदेश दिया था. साथ ही निषाद राज का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति हमेशा वनवासी समाज का सम्मान करती रही है.
यूसीसी पर दिया भरोसा
अमित शाह ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि यूसीसी की कोई भी पाबंदी वनवासी समाज पर लागू नहीं होगी और उनके अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे. उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार ने जनजातीय कल्याण के बजट में बड़ा इजाफा किया है. साथ ही पेसा कानून और पेसा सेल के जरिए आदिवासी समाज को उनकी भाषा में कानून की जानकारी दी जा रही है. अमित शाह ने मध्य प्रदेश के पेसा कानून को आदर्श मॉडल बताया.
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समाज को जोड़ने का संदेश
गृह मंत्री ने कहा कि वनवासी कल्याण आश्रम और जनजातीय सुरक्षा मंच समाज को एकजुट करने का काम कर रहे हैं. उनके अनुसार यह समागम आने वाले समय में जनजातीय समाज के बड़े सांस्कृतिक आयोजन के रूप में याद किया जाएगा.
-भारत एक्सप्रेस
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