Global Oil Crisis India Impact: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग के बाद दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं इस समय गहरे संकट से जूझ रही हैं. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और डेटा के अनुसार, दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 45 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं. इस महा-संकट के बीच भारत के पड़ोसी देशों और अमेरिका-कनाडा जैसे विकसित देशों की हालत खस्ता है.
हालांकि, दुनिया की तुलना में भारत इस वैश्विक आर्थिक सुनामी से काफी हद तक सुरक्षित बचा हुआ है. जहां म्यांमार, फिलीपींस और मलेशिया जैसे देशों में आम जनता हाहाकार कर रही है, वहीं भारत में तेल के दामों में करीब 8 प्रतिशत की ही बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो सरकार की कूटनीतिक और वित्तीय रणनीति की एक बड़ी जीत मानी जा रही है.
कहां कितना इजाफा?(Global Oil Crisis India Impact)
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति (Supply Chain) प्रभावित होने के कारण तेल की कीमतों में जो उछाल आया है, उसकी लिस्ट डराने वाली है. विभिन्न देशों में हुए मूल्य इजाफे का प्रतिशत इस प्रकार है:
| देश | तेल की कीमतों में बढ़ोतरी (%) |
|---|---|
| म्यांमार | 100% (दाम सीधे दोगुने) |
| फिलीपींस | 72.6% |
| मलेशिया | 68.1% |
| कंबोडिया | 68% |
| वियतनाम | 50% |
| पाकिस्तान | 49% |
| अमेरिका | 47% |
| जिम्बाब्वे और नाइजीरिया | 35% से 47% |
| लाओस | 45% |
| कनाडा | 30% |
| चीन, जापान और ब्रिटेन | 19% से 30% |
| बांग्लादेश | 17% |
| भारत | करीब 8% |
म्यांमार-पाकिस्तान बेहाल, अमेरिका तक कांपा
इस सूची में सबसे बदतर स्थिति भारत के पड़ोसी देश म्यांमार की है, जहां दाम सीधे 100 फीसदी बढ़ चुके हैं. कंगाली की कगार पर खड़े पाकिस्तान में कीमतें 49 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं, जिससे वहां की जनता बुनियादी परिवहन के लिए भी तरस रही है. सबसे चौंकाने वाले आंकड़े अमेरिका और वियतनाम के हैं, जहां क्रमशः 47% और 50% का भारी उछाल देखा गया है.
वहीं अमेरिका जैसी महाशक्ति में तेल का इस कदर महंगा होना वहां की घरेलू राजनीति और महंगाई (Inflation) को रिकॉर्ड स्तर पर ले गया है. इस पूरी वैश्विक तबाही के बीच भारत एकमात्र ऐसी बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा है, जिसने इस झटके को बेहद सफलतापूर्वक संभाला है.
4 साल बाद कैसे और कब बदला रेट?
भारत में तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद करीब चार साल तक खुदरा उपभोक्ताओं के लिए कीमतों को स्थिर रखा था. लेकिन लगातार बढ़ते कच्चे तेल के दामों के बाद मई 2026 में इसमें आंशिक सुधार करना पड़ा. बताते चलें भारत में हालिया मूल्य वृद्धि की पूरी टाइमलाइन (Global Oil Crisis India Impact) इस प्रकार है:
15 मई 2026 (पहला झटका): लगभग 4 साल के लंबे अंतराल के बाद सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल में करीब ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की.
19 मई 2026 (दूसरा सुधार): अंतरराष्ट्रीय बाजार के दबाव में पेट्रोल की कीमतों में 90 पैसे प्रति लीटर का एक और इजाफा हुआ.
23 मई 2026 (तीसरी बढ़ोतरी): देश के कई हिस्सों में पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ. इसी दिन दिल्ली में सीएनजी के दाम भी ₹1/किलो बढ़ाए गए.
25 मई 2026 (ताजा स्थिति): पेट्रोल में ₹2.61 और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की ताजा बढ़ोतरी की गई. 10 दिनों के भीतर कुल मिलाकर करीब ₹7.38/लीटर (लगभग 7 से 8 प्रतिशत) की कुल वृद्धि के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल ने ₹100 का आंकड़ा पार कर ₹102.12 प्रति लीटर का स्तर छुआ, जबकि डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पर पहुंच गया. मुंबई में यह क्रमशः ₹111.21 और ₹97.83 पर ट्रेंड कर रहा है.
ये भी पढ़ें- पीएम मोदी का युवाओं को महा-तोहफा! आज 51,000 युवाओं को सौंपेंगे सरकारी नौकरी के जॉइनिंग लेटर
भारत इस महा-संकट में कैसे बचा रहा?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जहां दुनिया के देश तेल संकट से तबाह हो गए, वहीं भारत में सिर्फ 8% की बढ़ोतरी के पीछे भारत सरकार की ‘रूस-नीति’ और कूटनीति है. जब पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए, तब भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए रूस से भारी डिस्काउंट (छूट) पर कच्चा तेल खरीदना जारी रखा.
इसके अलावा, भारत ने समय रहते अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (बफर स्टॉक) का सही इस्तेमाल किया और घरेलू करों (Excise Duty & VAT) को संतुलित रखा. यही कारण है कि जहां दुनिया भर में हाहाकार मचा है, भारतीय अर्थव्यवस्था इस वैश्विक झटके (Global Oil Crisis India Impact) को न्यूनतम नुकसान के साथ झेलने में सफल रही है.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.




