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बंगाल में सत्ता बदलते ही चेंज हुआ लॉ एंड ऑर्डर! जानें कैसे कच्छा-बनियान में दौड़ लगा रहे ममता सरकार के दबंग गुंडे

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद हावड़ा पुलिस ने गैंगस्टर आकाश सिंह और सनी मोल्ला पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की है. बीजेपी सरकार इसे ‘कानून का डर’ बता रही है, जबकि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक परेड पर गंभीर सवाल उठाए हैं…

पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक तख्तापलट के बाद सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की नई भाजपा सरकार पूरे एक्शन मोड (West Bengal UP Model Action) में आ गई है. सालों तक तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कथित राजनीतिक संरक्षण में पलने वाले बाहुबलियों और जबरन वसूली करने वाले गुंडों का रसूख अब सीधे मिट्टी में मिलाया जा रहा है. उत्तर प्रदेश के ‘बुलडोजर मॉडल’ की तर्ज पर अब बंगाल पुलिस भी अपराधियों के हौसले पस्त करने के लिए ‘ऑन-स्पॉट’ हंटर चला रही है.

दरअसल हावड़ा सिटी पुलिस ने 24 घंटे के भीतर दो बड़े अपराधियों पहले कुख्यात गैंगस्टर आकाश सिंह और फिर संकराइल में टीएमसी के करीबी ‘छोटे डॉन’ सनी मोल्ला को केवल अंडरवियर और बनियान में सरेआम सड़कों पर दौड़ा दिया. सरकार बदलने के साथ ही खाकी के इस बदले हुए रौद्र रूप को देखकर पूरे इलाके के अपराधियों में हड़कंप मच गया है.

 

ममता राज के दबंग सनी मोल्ला का उतरा नशा

जैसे ही राज्य की सत्ता से टीएमसी बेदखल हुई, पुलिस ने सबसे बड़ा प्रहार संकराइल इलाके में समानांतर सत्ता चलाने वाले सनी मोल्ला पर किया. सनी मोल्ला पहले एक संविदा होम गार्ड (Contractual Home Guard) के तौर पर काम करता था, लेकिन राजनीतिक रसूख की आड़ में उसने अपना एक खूंखार गैंग बना लिया था.

आरोप है कि वह टीएमसी के स्थानीय नेताओं की शह पर व्यापारियों, दुकानदारों और आम जनता से बड़े पैमाने पर रंगदारी और जबरन वसूली (Extortion) का सिंडिकेट चलाता था. पुलिस जब उसे उसी के गढ़ में कच्छा-बनियान में नंगे पैर परेड कराने ले गई, तो कल तक खौफ के साए में जीने वाली जनता इस नए शासन के एक्शन को देखकर दंग रह गई.

आकाश सिंह का टशन मिला मिट्टी में (West Bengal UP Model Action)

सनी मोल्ला से पहले पुलिस की क्राइम ब्रांच और डिटेक्टिव डिपार्टमेंट ने इस महा-कार्रवाई की शुरुआत कुख्यात गैंगस्टर आकाश सिंह से की थी. आकाश सिंह पर हावड़ा के मालिपंचघरा और गोलाबाड़ी थाना क्षेत्रों में अवैध कब्जे, 20 से अधिक बम धमाके करने और साल 2021 में एक पुलिस अधिकारी पर सीधे गोली चलाने जैसे कई संगीन मामले दर्ज हैं. सालों से फरार चल रहे इस इनामी बदमाश को जब भारी सुरक्षा घेरे और बंदूकों के बीच अर्ध-नग्न अवस्था में उन तंग गलियों और चौराहों पर घुमाया गया जहां कभी उसका सिक्का चलता था, तो उसका सारा बाहुबल हवा हो गया.

बीजेपी सरकार का सख्त संदेश

बीजेपी के सत्ता में आते ही पुलिस के इस बदले हुए सिंघम अवतार पर राज्य की सियासत का पारा चढ़ गया है. भाजपा नेताओं का साफ कहना है कि पिछले १५ सालों में ममता बनर्जी के शासनकाल के दौरान जिन अपराधियों को थानों से संरक्षण मिलता था, अब उनके लिए जेल या सुधार ही एकमात्र रास्ता बचा है.

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि बंगाल की धरती पर अब किसी भी तरह का ‘कट-मनी’ (जबरन वसूली) या सिंडिकेट राज बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अपराधियों के मन में खाकी का ऐसा ही खौफ जरूरी है.

मानवाधिकार बनाम ऑन-स्पॉट न्याय

भले ही आम जनता इस सख्त कार्रवाई(West Bengal UP Model Action) पर तालियां बजा रही हो, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस ‘शॉर्टकट न्याय’ पर गंभीर संवैधानिक सवाल खड़े कर दिए हैं. उनका कहना है कि कोर्ट से सजा मिलने से पहले किसी भी आरोपी या विचाराधीन कैदी को इस तरह अर्ध-नग्न अवस्था में सार्वजनिक रूप से परेड कराना सुप्रीम कोर्ट के ‘ह्यूमन डिग्निटी’ (मानवीय गरिमा) के दिशा-निर्देशों का सीधा उल्लंघन है.

हालांकि, हावड़ा सिटी पुलिस के आला अधिकारियों का साफ कहना है कि यह कोई सजा नहीं, बल्कि ‘क्राइम सीन रीक्रिएशन’ और सबूत जुटाने की एक आवश्यक कानूनी प्रक्रिया थी ताकि पीड़ित लोग बिना किसी डर के कोर्ट में गवाही दे सकें.

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-भारत एक्सप्रेस



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