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तिहाड़ जेल में सजायाफ्ता और 6 हत्याओं के दोषी ने 10 घण्टों की पैरोल पर आकर मेरठ में किया निकाह

Meerut Crime News: मेरठ के दौराला क्षेत्र में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. दिल्ली में 6 लोगों की बेरहमी से हत्या के दोषी वाजिद ने तिहाड़ जेल से 10 घंटे की पैरोल पर मेरठ आकर पुलिस कस्टडी में निकाह किया. निकाह के दौरान पूरे गांव में भारी पुलिस बल तैनात रहा. कार्यक्रम पूरा होते ही पुलिस टीम वाजिद को वापस तिहाड़ जेल ले गई.

Meerut Crime News

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Meerut Crime News: मेरठ के दौराला क्षेत्र में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. दिल्ली में 6 लोगों की बेरहमी से हत्या के दोषी वाजिद ने तिहाड़ जेल से 10 घंटे की पैरोल पर मेरठ आकर पुलिस कस्टडी में निकाह किया.

ये पूरा वाकया सोमवार को हुआ. जहां दिल्ली पुलिस की टीम वाजिद को लेकर मेरठ के दौराला स्थित उसके गांव समौली पहुंची. कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे समोली गांव ले जाया गया. यहां सीमित रिश्तेदारों और कुछ लोगों की मौजूदगी में युवती यासमीन के साथ उसका निकाह कराया गया.

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पूरे गांव में भारी पुलिस बल तैनात रहा

निकाह के दौरान पूरे गांव में भारी पुलिस बल तैनात रहा. हर गतिविधि पर सख्त नजर रखी गई. कार्यक्रम पूरा होते ही पुलिस टीम वाजिद को वापस तिहाड़ जेल ले गई.

यह पूरा मामला गांव में चर्चा का विषय बन गया है. लोग हैरानी जता रहे हैं कि 6 लोगों की हत्या जैसे जघन्य अपराध में सजा काट रहे व्यक्ति को निकाह के लिए पैरोल कैसे दी गई.

पूरे परिवार को काट डाला था

बता दें कि वाजिद दिल्ली के चर्चित 6 लोगों की हत्या मामले में दोषी है. इस मामले में दिल्ली के फर्नीचर कारोबारी मुनव्वर, उनकी पत्नी, दो बेटियों और दो बेटों की निर्मम हत्या की गई थी. जांच में पता चला था कि कारोबारी का नौकर वाजिद अपने साथियों के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया था. हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए शवों को अलग-अलग जगहों पर छिपाया गया था. मुनव्वर और उनके दो बेटों के शव फ्लैट में गड्ढा खोदकर दबाए गए, जबकि पत्नी और बेटियों के शव मेरठ की काली नदी में फेंके गए थे.

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पुलिस ने कई दिनों की छानबीन के बाद मामले का खुलासा किया और आरोपियों को गिरफ्तार किया. अदालत ने वाजिद को दोषी करार देते हुए लंबी सजा सुनाई थी. वह पिछले करीब 10 वर्षों से तिहाड़ जेल में बंद है. इस घटना ने कानूनी और सामाजिक दोनों स्तर पर बहस छेड़ दी है कि गंभीर अपराधियों को पैरोल पर छोड़ने की प्रक्रिया कितनी उचित है.

-भारत एक्सप्रेस



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