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जंग के मैदान से आई राहत की खबर: अमेरिका-ईरान के बीच ‘महा-डील’, खुलेगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज!

US-Iran deal: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक संभावित शुरुआती समझौते का मसौदा सामने आया है. इसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने और सैन्य तैनाती घटाने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं.

US Iran deal

US-Iran deal

US-Iran deal: अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित समझौते को लेकर खबर सामने आई है. ईरान के सरकारी टीवी चैनल के मुताबिक, दोनों देशों के बीच तनाव खत्म करने के लिए एक शुरुआती, अनौपचारिक मसौदा तैयार हुआ है, जिसका एक ड्राफ्ट तेहरान को मिला है.

इस प्रस्ताव के अनुसार, ईरान एक महीने के भीतर होर्मुज स्ट्रेट से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को युद्ध से पहले जैसी स्थिति में वापस लाएगा. बदले में अमेरिका अपने आसपास के इलाकों से सैन्य बलों को हटाएगा और समुद्री नाकेबंदी को समाप्त करेगा. हालांकि, ईरान टीवी ने कहा कि यह अभी आधिकारिक समझौता नहीं है, बल्कि शुरुआती स्तर की रूपरेखा बताई जा रही है.

मसौदे में और क्या-क्या है?

ईरान के सरकारी टीवी के मुताबिक इस प्रस्ताव में कुछ अहम मुद्दों पर अभी भी पूरी सहमति नहीं बन पाई है. इसमें सबसे पहले यह साफ किया गया है कि युद्धपोतों की तैनाती में किसी बड़े बदलाव का कोई हिस्सा शामिल नहीं है. इसके अलावा होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही के प्रबंधन को लेकर ईरान और ओमान के बीच मिलकर काम करने का जो विचार है, उस पर भी अभी सहमति नहीं बनी है. इसी वजह से यह मुद्दा फिलहाल अनसुलझा है.

मसौदे में यह भी लिखा है कि जब तक किसी भी तरह की ठोस और स्वतंत्र जांच या सत्यापन नहीं हो जाता, तब तक ईरान कोई भी कदम आगे नहीं बढ़ाएगा. इसके साथ एक और महत्वपूर्ण बात कही गई है कि अगर 60 दिनों के अंदर दोनों देशों के बीच अंतिम समझौता हो जाता है, तो उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के जरिए मंजूरी दिलाकर एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता बनाया जा सकता है. इसका मतलब होगा कि इसके बाद दोनों पक्षों के लिए इसे मानना अनिवार्य हो जाएगा.

फरवरी से शुरू थी कवायद

अमेरिका और ईरान के बीच तैयार हो रहा यह MoU दरअसल फरवरी में शुरू हुए संघर्ष के बाद शुरू हुई अप्रत्यक्ष बातचीत का परिणाम बताया जा रहा है. दोनों देशों ने सीधे बातचीत करने के बजाय अलग-अलग माध्यमों से संवाद शुरू किया था.


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इस पूरी प्रक्रिया में एक तीसरे पक्ष ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है, और रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान ने इस बातचीत को आगे बढ़ाने और दोनों पक्षों के बीच संदेशों के आदान-प्रदान में अहम योगदान दिया है. यानी यह समझौता अचानक नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही अनौपचारिक बातचीत और मध्यस्थता का नतीजा माना जा रहा है.

-भारत एक्सप्रेस



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