सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में दायर याचिकाओं पर केंद्र सरकार से 2 जुलाई तक हलफनामा देने को कहा है. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने यह नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से हलफनामे में बताने को कहा कि आगे से परीक्षा प्रक्रिया और समापन कैसे और किस प्रकार किया जाएगा. साथ ही यह बताने को कहा कि विशेषज्ञ कर्मियों की नियुक्ति और संस्थागत विविधता के माध्यम से निरंतरता की संस्थागत स्मृति को कैसे स्थापित किया जाए. इसके अलावा यह सुनिश्चित करना है कि एनटीए के पास 2024 या 2036 की परीक्षा आयोजित करने के लिए भौतिक और बौद्धिक संसाधन उपलब्ध हों.
जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि हमे अपने युवाओं को निराश नहीं करना चाहिए. कोर्ट ने कहा भावनाओं और समय का इतना निवेश करना बहुत ही दुखद होता है. वही सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि प्रधानमंत्री खुद इसकी निगरानी कर रहे है. इसपर कोर्ट ने कहा की अगर ऐसा हो रहा है तो यह अत्यंत दुखद है. हम अपने छात्रों को निराश नहीं कर सकते. यह केवल छात्र का मामला नहीं है, बल्कि परिवार का भी है. कोर्ट ने कहा इसमें भावनाओं, प्रेम, समय, वर्षो की पढ़ाई का बहुत कुछ जुड़ा है. यह हमारे बस की बात है. कोर्ट ने कहा कि NTA को यूपीएससी से सबक लेनी चाहिए.
1000 से अधिक सुरक्षित परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था
एनटीए द्वारा दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि परीक्षा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए गए हैं. जिनमें पेपर सेट करने वालो के लिए रेंडमाइजेशन और रोटेशन नीतियां शामिल है. जिनमें अधिकारियों की पृष्ठभूमि की जांच, एआई आधारित अनुवाद उपकरण, एक हजार सुरक्षित परीक्षा केंद्र, क्लाउड आधारित एआई-एमएल ब्लॉकचेन इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई आधारित सीसीटीवी निगरानी, उन्नत साइबर सुरक्षा प्रणाली और परिणाम प्रसंस्करण के लिए उन्नत आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है. हलफनामे में यह भी कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी ने कई बड़े कदम उठाए हैं. यह जानकारी पूर्व इसरो प्रमुख और एनटीए सुधार समिति के अध्यक्ष डॉक्टर के. राधाकृष्णन ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में दी है. हलफनामे में बताया गया है कि साल 2024 में नीट यूजी परीक्षा को लेकर उठे सवालों के बाद शिक्षा मंत्रालय ने विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति बनाई थी.
इस समिति ने NTA की परीक्षा व्यवस्था, डेटा सुरक्षा और कामकाज में सुधार के लिए 101 सुझाए दिए थे. डॉक्टर राधाकृष्णन ने बताया कि इन सुझावों को लागू करने की निगरानी के लिए एक हाई पावर्ड स्टीयरिंग कमेटी बनाई गई. समिति लगातार NTA द्वारा किए जा रहे सुधारों की समीक्षा कर रही है. हलफनामे के अनुसार नीट यूजी 2025 और 2026 में राज्यों की भूमिका बढ़ाई गई. राज्य और जिला स्तर पर समितियां बनाई गई, जिन्होंने परीक्षा केंद्रों की जांच और सुरक्षा व्यवस्था में अहम भूमिका निभाई. 2026 की नीट यूजी परीक्षा के 99.5 प्रतिशत से ज्यादा केंद्र सरकारी संस्थानों में बनाए गए. हलफनामे में यह भी कहा गया है कि NTA को मजबूत करने के लिए 16 नए पद बनाए गए हैं. इसके अलावा आईआईटी, यूजीसी और केंद्रीय विद्यालय संगठन जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद भी ली जा रही है. परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए कई स्तर की जांच व्यवस्था लागू की गई है.
मोबाइल सिग्नल रोकने के लिए जैमर लगाने की व्यवस्था
परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए है, जिनकी निगरानी केंद्र स्तर पर की जाती है. साथ ही मोबाइल सिग्नल रोकने के लिए जैमर भी लगाए गए हैं. वही NTA की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया है कि परीक्षा व्यवस्था में किए गए बड़े बदलावों और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी है. NTA ने कहा कि परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार की ओर से बनाई गई निगरानी समिति लगातार काम कर रही है और उसकी सिफारिशों को लागू किया जा रहा है. दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज, एक साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट और एक फॉरेंसिक वैज्ञानिक वाली उच्च-स्तरीय निगरानी समिति की नियुक्ति की मांग की गई है.
याचिकाकर्ताओं के अनुसार समिति को नीट यूजी 2026 के दोबारा आयोजित होने की निगरानी तब तक करनी चाहिए जब तक कि परीक्षा प्रक्रिया की देखरेख के लिए प्रस्तावित राष्ट्रीय परीक्षा अखंडता आयोग औपचारिक रूप से गठित नही हो जाती. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह दुखद है कि एनटीए अब तक पिछले मामलों से कोई सबक नहीं सीख पाया है.
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में FAIMA और UDF ने एनटीए को बदलने या उसमें बड़े बदलाव करने और नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट-अंडरग्रेजुएट (नीट यूजी) कराने के लिए एक ज्यादा सुरक्षित और ऑटोनॉमस सिस्टम बनाने के निर्देश दिए जाने की मांग की है. NTA के मुताबिक अब परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी, जिसकी नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी.
एजेंसी ने एक बयान में कहा था कि यह निर्णय पारदर्शिता बनाए रखने और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली में विश्वास को बनाए रखने के हित मे लिया गया है. 22 लाख से ज्यादा छात्रों को अब फिर से परीक्षा देनी होगी. नीट का पेपर गैस बुक के जरिए लीक किया गया. इसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के 300 से ज्यादा सवाल थे. ये सभी हाथ से लिखे गए और इनकी हैंडराइटिंग भी एक ही थी. जांच एजेंसी पता लगा रही हैं कि आखिर यह पेपर लीक कहां से हुआ.
हालांकि इसका खुलासा राजस्थान के सीकर से हुआ है.
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