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टोंक में नियमों की सख्ती जिंदगी पर पड़ी भारी, बीमार पिता को ले जा रहे युवक को ट्रैफिक पुलिस ने 1 घंटे रोके रखा, आईसीयू में तोड़ दिया दम

Tonk News: टोंक में गंभीर हालत में अस्पताल ले जाए जा रहे बुजुर्ग को रास्ते में ट्रैफिक पुलिस ने रोक लिया और करीब एक घंटे तक बाइक नहीं जाने दी. बाद में अस्पताल पहुंचने पर बुजुर्ग की मौत हो गई. इस घटना के बाद लोगों में भारी नाराजगी है.

Tonk News

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Tonk News: टोंक में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पुलिस की कार्यशैली पर बड़े गंभीर और जरूरी सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि यहां यातायात नियमों की सख्ती एक बुजुर्ग की जान पर भारी पड़ गई. परिवार का कहना है कि गंभीर हालत में अस्पताल ले जाए जा रहे बुजुर्ग को रास्ते में ट्रैफिक पुलिस ने रोक लिया और करीब एक घंटे तक बाइक नहीं जाने दी. बाद में अस्पताल पहुंचने पर बुजुर्ग की मौत हो गई. इस घटना के बाद लोगों में भारी नाराजगी है.

घटना के विरोध में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए. लोगों ने कलेक्ट्रेट और एसपी कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग है कि इस मामले में जिम्मेदार यातायात कर्मी राजकुमार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. साथ ही पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए. लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर आरोपी पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो और बड़ा आंदोलन किया जाएगा.

बाइक पर 3 लोगों को देख रोक दी गाड़ी

दरअसल यह मामला 14 जून का बताया जा रहा है. महेंद्र यादव अपने बीमार पिता को इलाज के लिए टोंक के सआदत अस्पताल लेकर जा रहे थे. बीमार पिता को पकड़ने के लिए भी पीछे एक व्यक्ति को बैठा लिया था. बाइक पर तीन लोग सवार देखकर ट्रैफिक पुलिसकर्मी राजकुमार ने बाइक को रोक लिया और उसकी चाबी निकाल ली.

परिजनों का कहना है कि महेंद्र यादव बार-बार पुलिसकर्मी से कहते रहे कि उनके पिता की हालत बहुत गंभीर है और उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाना जरूरी है. उन्होंने पुलिसकर्मी से काफी विनती भी की लेकिन उसने उनकी कोई बात नहीं सुनी. आरोप है कि करीब एक घंटे तक उन्हें वहीं रोके रखा और बाद में चालान काटने के बाद बाइक की चाबी वापस दी.

आईसीयू में तोड़ा दम

जब तक परिवार बुजुर्ग को अस्पताल लेकर पहुंचा, तब तक उनकी हालत और ज्यादा बिगड़ चुकी थी. डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत आईसीयू में भर्ती किया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

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परिवार का आरोप है कि अगर समय पर अस्पताल पहुंचने दिया जाता तो शायद उनकी जान बच सकती थी. इस घटना के बाद लोगों में गुस्सा है और कई सवाल उठ रहे हैं. लोगों का कहना है कि नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन किसी मेडिकल इमरजेंसी में इंसानियत और संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी है.अब इस मामले में क्या कार्रवाई होती है और पीड़ित परिवार को कब तक न्याय मिल पाता है, यह तो वक्त बताएगा.

(भारत एक्सप्रेस के लिए कजोड़ गुर्जर की रिपोर्ट)



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