Ajab Gajab बिहार का समस्तीपुर जिला अपने आप में कई ऐतिहासिक और धार्मिक विरासतों को समेटे हुए है. लेकिन यहां की बूढ़ी गंडक नदी के किनारे स्थित मां काली का एक मंदिर ऐसा भी है, जिसकी कहानी विज्ञान को हैरान करती है और आस्था को एक नया मुकाम देती है. स्थानीय लोगों के बीच इस प्राचीन मंदिर को लेकर एक ऐसी चमत्कारी और मायावी मान्यता है, जिसे सुनकर आज भी लोग दांतों तले उंगली दबा लेते हैं.
अंग्रेजों के जमाने में अघोरी बाबा का ‘चमत्कार’
धार्मिक दृष्टिकोण से समस्तीपुर हमेशा से बेहद खास रहा है. लेकिन बूढ़ी गंडक नदी के तट पर स्थित इस काली मंदिर का इतिहास बाकी सभी धार्मिक स्थलों से बिल्कुल अलग और रहस्यमयी है. बुजुर्ग बताते हैं कि इसका इतिहास भारत में अंग्रेजी हुकूमत के दौर से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि उस समय यहां एक रहस्यमयी अघोरी बाबा आए थे, जिन्होंने नदी किनारे इस सुनसान जगह को अपनी तपस्थली बनाया.
फिर एक रात कुछ ऐसा हुआ जो आज भी पहेली बना हुआ है. मान्यता है कि उन अघोरी बाबा ने अपनी तंत्र साधना और दैवीय बल के दम पर सिर्फ एक ही रात के भीतर इस पूरे मंदिर का निर्माण करा दिया. अगली सुबह जब स्थानीय लोग नदी किनारे पहुंचे, तो वहां अचानक एक भव्य मंदिर देखकर दंग रह गए.
मंदिर बनाकर अचानक गायब हो गए बाबा
चर्चा तो इस बात की भी होती है कि रातभर में मंदिर खड़ा करने के बाद वे अघोरी बाबा अचानक वहां से अंतर्ध्यान हो गए. इसके बाद उन्हें कभी किसी ने नहीं देखा. यही कारण है कि इस मंदिर को लेकर लोगों के बीच आज भी कई तरह की रहस्यमयी चर्चाएं होती रहती हैं. नदी के किनारे होने की वजह से यह जगह प्राकृतिक रूप से भी बेहद शांत और खूबसूरत लगती है.
समस्तीपुर के रहने वाले एसके झा बताते हैं कि ये मंदिर उनके जन्म से भी बहुत पहले का है. बचपन से ही वह पूर्वजों से सुनते आ रहे हैं कि अघोरी बाबा ने इसे एक रात में बनाया था. श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि यहां सच्चे मन से जो भी मन्नत मांगी जाती है, मां काली उसे जरूर पूरा करती हैं. यही वजह है कि आज भी इस मंदिर की महिमा और लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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